मेरठ पुलिस अपने कारनामों को लेकर चर्चा में बनी ही रहती है, एक बार फिर मेरठ पुलिस ने सुर्खियां बटोरी हैं। दरअसल इन दिनों में मेरठ में एक गैंगस्टर का मामला छाया हुआ है, पुलिस ने बागपत जिले के बरनावा में एक असहाय महिला और उसके परिवार पर फर्जी केस दर्ज किया था, और फिर खुद ही क्लीनचिट दे दी थी, लेकिन एक बार फिर पुलिस असहाय महिला और परिवार पर झूठा गैंगस्टर केस बनाकर खुद को बचाने की साजिश रच रही है।
बता दें महिला खुद इतनी असहाय, बीमार है कि वो चल फिर भी नहीं सकती है और पुलिस इस तरह से उस पर उसके परिवार पर झूठे आरोप लगाकर उनकी तकलीफें और बढ़ा रही। उन्हें जरा भी इस बात का मलाल नहीं आ रहा कि इन आरोपो से उन पर क्या बीत रही है।
महिला अलीसा जो कई सालों से बीमार है. वो बिस्तर से उठने के लिए भी लोगों की मदद लेती है. अलीसा ने बताया की उनको कई तरह को बीमारी है। जिसमे किडनी में पथरी, हाई ब्लड प्रेशर, इन्फेक्शन और घुटने भी खराब हैं। ऐसे में वो अपना जीवन जैसे तैसे व्यतीत कर रही हैं, लेकिन पुलिस ने उन पर गैंगस्टर लगा दी है। गैंगस्टर लगाने के बाद पुलिस से बचने के लिए उनका परिवार फरार है।
वहीं इस मामले को लेकर महिला ने वकील हायर किया हुआ है, वकील राम कुमार ने बताया कि पुलिस के पास कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं, एक मात्र कागज़ की फोटो कॉपी है, कोई भी ओरिजनल कागज़ पुलिस के पास नहीं है।अग बिना किसी सख्त सबूत के बिना अगर पुलिस महिला अलीसा को गिरफ्तार करती है तो सवाल खड़े हो जाएंगे कि एक आम आदमी की रक्षा के बजाय पुलिस परेशनान करने का काम कर रही है।
महिला का आरोप है कि एसएसपी दफ्तर के बाहर भी उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया है। महिला ने कहा है कि वह वहां चलने के लिए दो लोगों का सहारा ले रही थी तो दफ्तर के गार्ड ने उनके साथ बदतमीजी की और जल्दी चलने को कहा। वहीं वकील राम कुमार ने सवाल उठाए हैं कि जब इन पर गैंगस्टर एक्ट लगा है तो इन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है, उन्होंने कहा कि इस केस में पुलिस के पास कोई खास सबूत नहीं है। इसके बावजूद राजस्थान के कांग्रेस नेता से साठगांठ कर पुलिस ने महिला और उनके परिजनों पर गैंगस्टर एक्ट लगा दिया।
अलीशा रोते हुए कहती हैं कि मैं तो अल्लाह के बुलावे के इंतजार में बरसों से बैठी हूं। अब कानून की लाठी पड़ी है, मैं मौत मांग रही थी, लेकिन यहां तो फांसी देकर अधमरा कर दिया गया।

