Iran Internet Shutdown: ईरान एक ऐसे मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है, जहां से आम नागरिकों का डिजिटल दुनिया से जुड़ाव लगभग खत्म हो सकता है। हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद लगाए गए लंबे इंटरनेट प्रतिबंध के बीच अब संकेत मिल रहे हैं कि खामेनेई की सरकार वैश्विक इंटरनेट को स्थायी रूप से सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अगर यह योजना लागू होती है, तो ईरान के आम लोग दुनिया से ऑनलाइन तौर पर लगभग कट जाएंगे।
वैश्विक इंटरनेट अब अधिकार नहीं, सुविधा?
डिजिटल अधिकारों पर काम करने वाले संगठनों का दावा है कि ईरान सरकार इंटरनेट को नागरिक अधिकार मानने के बजाय एक “सरकारी सुविधा” में बदलना चाहती है। इसका मतलब यह होगा कि:
- हर नागरिक को खुला इंटरनेट नहीं मिलेगा
- सरकार तय करेगी कि कौन क्या देख सकता है
- आम लोग सिर्फ सरकारी नेटवर्क तक सीमित रहेंगे
इस व्यवस्था में स्वतंत्र सूचना तक पहुंच बेहद मुश्किल हो जाएगी।
फिल्टरवॉच का बड़ा दावा
इंटरनेट सेंसरशिप पर नजर रखने वाली संस्था फिल्टरवॉच के अनुसार, यह योजना अचानक नहीं बल्कि लंबे समय से चुपचाप तैयार की जा रही है। रिपोर्ट बताती है कि भविष्य में केवल वही लोग अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट इस्तेमाल कर पाएंगे:
- जिन्हें सरकार से विशेष अनुमति मिले
- जो सुरक्षा जांच में पास हों
- या जो सरकारी संस्थानों से जुड़े हों
बाकी नागरिकों के लिए सिर्फ नियंत्रित “नेशनल इंटरनेट” ही उपलब्ध रहेगा।
8 जनवरी से जारी सख्त डिजिटल लॉकडाउन
ईरान में 8 जनवरी को विरोध प्रदर्शनों के बाद अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद कर दिया गया था। तब से लेकर अब तक:
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ठप हैं
- विदेशी वेबसाइट्स तक पहुंच बंद है
- VPN पर भी सख्त निगरानी है
सरकारी बयान के मुताबिक यह पाबंदी कम से कम 20 मार्च तक जारी रह सकती है।
चीन मॉडल से प्रेरित व्यवस्था
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जिस सिस्टम पर काम कर रहा है, वह काफी हद तक चीन के इंटरनेट कंट्रोल मॉडल जैसा है। इसमें:
- व्हाइटलिस्टिंग तकनीक का इस्तेमाल
- पूरे देश के डेटा ट्रैफिक पर निगरानी
- कंटेंट फिल्टरिंग और रियल-टाइम ट्रैकिंग
शामिल है। इससे सरकार न केवल सूचना को नियंत्रित करेगी, बल्कि असहमति की आवाजों को भी दबा सकेगी।
2026 के बाद खुले इंटरनेट की उम्मीद कम
डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी संकेत साफ बता रहे हैं कि 2026 के बाद भी खुले इंटरनेट की वापसी की कोई ठोस योजना नहीं है। इसका असर आने वाले वर्षों में और गहरा हो सकता है, खासकर युवा वर्ग और कारोबारियों पर।
अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा गहरा असर
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से:
- ईरान की डिजिटल अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा
- स्टार्टअप और ऑनलाइन बिजनेस बंद होने की कगार पर आएंगे
- विदेशी निवेश और व्यापार और कमजोर होगा
एक अमेरिकी पूर्व अधिकारी ने इसे “डरावना और बेहद महंगा प्रयोग” बताया है।
सांस्कृतिक और सामाजिक दूरी बढ़ेगी
केवल अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि:
- शिक्षा
- वैश्विक संवाद
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान
भी प्रभावित होगा। ईरानी समाज का दुनिया से जुड़ाव सीमित हो जाएगा, जिससे अलगाव और असंतोष और बढ़ सकता है।
तत्काल नियंत्रण, लेकिन लंबी कीमत
डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरकार को भले ही अल्पकाल में नियंत्रण मिल जाए, लेकिन लंबे समय में:
- जनता का भरोसा कमजोर होगा
- तकनीकी पिछड़ापन बढ़ेगा
- सामाजिक अस्थिरता गहरी हो सकती है
यह फैसला ईरान के भविष्य को दशकों तक प्रभावित कर सकता है।
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