Love Marriage Controversy: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से सामने आई यह घटना एक बार फिर समाज और कानून के बीच खिंची रेखा को उजागर करती है। हसनपुर थाना क्षेत्र की एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसने अपनी मर्जी से किए गए प्रेम विवाह के बाद अपने ही परिजनों से जान का खतरा बताया है। युवती ने वीडियो के माध्यम से प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।
बालिग होने का दावा, शादी को बताया स्वैच्छिक निर्णय
वायरल वीडियो में मनीषा नाम की युवती खुद को बालिग बताते हुए कहती है कि उसने रूपचंद नामक युवक से अपनी इच्छा से विवाह किया है। उसके अनुसार, यह फैसला किसी दबाव, बहकावे या मजबूरी में नहीं लिया गया, बल्कि पूरी समझ और सहमति के साथ किया गया है।
युवती ने यह भी साफ किया कि वह अपने जीवन के फैसले खुद लेने में सक्षम है।
परिवार की प्रतिक्रिया ने बढ़ाई चिंता
मनीषा का आरोप है कि जब उसके प्रेम संबंध की जानकारी उसके मायके वालों को हुई, तो उसे भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया गया। वीडियो में उसने दावा किया कि परिवार की ओर से उसे कठोर शब्दों और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा, जिससे उसे अपनी सुरक्षा को लेकर डर सताने लगा।
ससुराल पक्ष को लेकर रखी स्पष्ट बात
युवती ने पुलिस प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि उसके पति के परिवार को इस मामले में परेशान न किया जाए। उसके मुताबिक, ससुराल पक्ष को इस विवाह की पहले कोई जानकारी नहीं थी और वे इस विवाद से पूरी तरह अलग हैं।
उसने कहा कि प्रेम विवाह का खामियाजा निर्दोष लोगों को नहीं भुगतना चाहिए।
“अगर कुछ हुआ तो जिम्मेदारी तय हो”
वीडियो में मनीषा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उसे और उसके पति को अपने ही परिजनों से खतरा है। उसने यह भी जोड़ा कि यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी उसके मायके पक्ष की होगी।
यह बयान कानून-व्यवस्था और सामाजिक सोच दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कानून की नजर में सही, समाज की नजर में गलत?
यह मामला एक बार फिर व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम सामाजिक दबाव की बहस को सामने लाता है। भारतीय कानून बालिगों को अपनी पसंद से विवाह करने का पूरा अधिकार देता है, लेकिन जमीनी हकीकत में ऐसे फैसले अक्सर विवाद और विरोध का कारण बन जाते हैं।
युवती का वीडियो इसी टकराव का प्रतीक बनता दिख रहा है।
प्रशासन की अग्निपरीक्षा
ऐसे संवेदनशील मामलों में पुलिस और प्रशासन की भूमिका बेहद अहम होती है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बालिग प्रेम विवाह में हस्तक्षेप गैर-कानूनी है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि स्थानीय प्रशासन युवती की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कुछ लोग युवती के फैसले को उसके अधिकार से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे पारिवारिक मूल्यों से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं।
लेकिन मूल सवाल वही है—क्या अपनी जिंदगी का फैसला खुद लेना आज भी समाज के लिए अस्वीकार्य है?
यह मामला समाज को सोचने पर मजबूर करता है कि मौलिक अधिकारों की आड़ में कहीं हम ऐसी स्वतंत्रता की ओर तो नहीं बढ़ रहे, जहाँ न समझी में अपने ही अपनों को भुलाकर, उनसे दूर होते जा रहे हैं अपने ही लोग।

