Noida News: नोएडा अथॉरिटी ने रियल एस्टेट सेक्टर में बकाया भुगतान को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए दो प्रमुख बिल्डरों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जांच कराने की सिफारिश की है। इन दोनों बिल्डरों पर कुल मिलाकर करीब 472 करोड़ रुपये का बकाया है, जो तय समय पर जमा नहीं किया गया। अथॉरिटी का कहना है कि बार-बार नोटिस देने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ, जिससे शहर के विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है।
बकायेदारों पर अब नहीं होगी नरमी
अथॉरिटी अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि अब बकाया राशि को लेकर कोई रियायत नहीं दी जाएगी। इस क्रम में दिल्ली स्थित इकोनॉमिक ऑफेंस विंग को पत्र भेजकर दोनों मामलों की वित्तीय जांच कराने का अनुरोध किया गया है। इससे पहले भी कई अन्य बिल्डरों के मामलों को EOW के पास भेजा जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट है कि प्रशासन सख्ती के मूड में है।
सेक्टर-50 प्रोजेक्ट से जुड़ा पहला मामला
पहला मामला सेक्टर-50 स्थित ग्रुप हाउसिंग प्लॉट F-21/C से जुड़ा है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 12,750 वर्ग मीटर है। यह प्लॉट वर्ष 2008 में TGB इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किया गया था। अथॉरिटी के अनुसार, प्लॉट की कीमत और बकाया भुगतान को लेकर कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन कंपनी की ओर से न तो संतोषजनक जवाब मिला और न ही राशि जमा की गई।
राहत योजना का भी नहीं उठाया लाभ
अथॉरिटी ने बताया कि संबंधित बिल्डर को अमिताभ कांत कमेटी की सिफारिशों के तहत भुगतान में राहत पाने का अवसर भी दिया गया था, लेकिन उसने इस योजना का लाभ नहीं लिया। फिलहाल इस परियोजना पर करीब 75.59 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसे लेकर अब EOW जांच की मांग की गई है।
सेक्टर-143 का बड़ा हाउसिंग प्रोजेक्ट
दूसरा मामला सेक्टर-143 में स्थित ग्रुप हाउसिंग प्लॉट GS-3B से संबंधित है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 50,000 वर्ग मीटर है। यह जमीन वर्ष 2011 में किंडल इंफ्राहाइट्स लिमिटेड को आवंटित की गई थी। अथॉरिटी के मुताबिक, कई नोटिस के बावजूद कंपनी ने भुगतान नहीं किया और अब उस पर करीब 396.96 करोड़ रुपये का बकाया हो चुका है।
वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की मांग
नोएडा अथॉरिटी ने इस मामले में भी EOW से अनुरोध किया है कि बकाया वसूली के साथ-साथ कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, लेन-देन और संभावित अनियमितताओं की जांच की जाए। अथॉरिटी का मानना है कि जांच से यह सामने आ सकेगा कि भुगतान में देरी के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।
विकास परियोजनाओं पर असर
अधिकारियों का कहना है कि समय पर भुगतान न होने से सड़क, सीवर, जलापूर्ति और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। बकाया राशि विकास कार्यों के लिए बेहद जरूरी होती है और इसके अटकने से शहर की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।
अन्य बिल्डरों के लिए चेतावनी इस कार्रवाई को नोएडा के अन्य बिल्डरों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। अथॉरिटी ने साफ किया है कि भविष्य में यदि किसी ने भुगतान में लापरवाही बरती, तो उसके खिलाफ भी इसी तरह की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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