UP Politics: उत्तर प्रदेश में भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलते ही पार्टी का लंबे समय से रुका हुआ संगठनात्मक बदलाव पूरा हो गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल के विस्तार का रास्ता भी साफ हो गया है। काफी समय से इस विस्तार का इंतजार किया जा रहा था।
उत्तर प्रदेश की मंत्रिपरिषद में कुल 60 मंत्री हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल इसमें 54 ही सदस्य हैं यानी अभी 6 मंत्री पद खाली हैं। अब सवाल यही है कि इन 6 खाली सीटों पर किन नेताओं को मौका मिल सकता है।
भूपेंद्र चौधरी की वापसी तय !
भाजपा के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ जाट नेता भूपेंद्र सिंह चौधरी को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। वह पहले योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है, संगठन की जिम्मेदारी छोड़ने के बाद उन्हें सरकार में जगह देना लगभग तय माना जा रहा है।
क्या यूपी को मिलेगा तीसरा उपमुख्यमंत्री?
अब जब ओबीसी नेता पंकज चौधरी को भाजपा की यूपी इकाई की कमान मिल गई है, तो पार्टी सामाजिक संतुलन बनाने की दिशा में भी सोच रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से किसी नेता को बड़ा पद दिया जा सकता है।
फिलहाल केशव प्रसाद मौर्य (ओबीसी) और ब्रजेश पाठक (ब्राह्मण) उपमुख्यमंत्री हैं. ऐसे में एससी वर्ग से तीसरा डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इन नेताओं के नाम भी चर्चा में
सूत्रों का कहना है कि पूर्व जल शक्ति मंत्री और मौजूदा एमएलसी महेंद्र सिंह की भी मंत्रिमंडल में वापसी हो सकती है। वह इस समय मध्य प्रदेश में भाजपा के चुनाव प्रभारी हैं,
इसके अलावा ऊंचाहार से समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए विधायक मनोज पांडे और बागी सपा विधायक पूजा पाल का नाम भी संभावित मंत्रियों की सूची में बताया जा रहा है।
क्षेत्रीय संतुलन पर भी नजर
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस कैबिनेट फेरबदल के जरिए क्षेत्रीय असंतुलन को भी दूर करने की कोशिश होगी। चूंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दोनों ही पूर्वी यूपी से जुड़े इलाकों से आते हैं, इसलिए कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों से नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
कब हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार?
सूत्रों के मुताबिक, खरमास खत्म होने के बाद यानी जनवरी के आखिर तक कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। भाजपा चाहती है कि आने वाले चुनावी साल से पहले संगठन और सरकार दोनों पूरी तरह तालमेल में नजर आएं।
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