देश में इस समय मामला हिंदू राष्ट्र बनाने की महिम छिड़ी हुई सत्ताधारी भाजपा पार्टी जगहों के नाम बदलने में लगी हुई है। ऐसा ही लखनऊ के नाम बदलने को लेकर पक्ष और विपक्ष में शब्दों की तगड़ी जंग छिड़ी हई है विपक्ष भाजपा पर निशाना साधते हुए कह रहा है कि देश की जनता को आप लोग पागल बना रहें है मंहगाई, बेरोजगारी, विकास के कार्यों की जगह नाम बदलकर देश प्रगति की ओर नही होने वाली है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का नाम बदले को लेकर बीते कुछ दिनों से बयानबाजी चल रही है, प्रतापगढ़ के सांसद संगम लाल गुप्ता ने हाल ही में लखनऊ का नाम बदलकर लक्ष्मण नगरी या लक्ष्मणपुरी करने की मांग की को लेकर पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी को चिट्ठी लिखी थी, अब इसको लेकर अमित शाह की प्रतिक्रिया सामने आई है।
अमित शाह ने कहा कि हम मुगलों के योगदान को हटाना नहीं चाहते हैं लेकिन इस देश की परंपरा को हम स्थापित करना चाहते हैं तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। एक भी शहर ऐसा नहीं है, जिसका पुराना नाम नहीं बदलकर नया ना किया गया हो इसको हमलोगों की सरकारों ने बहुत सोच समझकर फैसले लिए हैं और हर सरकार का ये विधाई अधिकार है।”
अमित शाह से पहले सीएम योगी ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कहा था कि अगर हम किसी जगह का नाम बदलेंगे तो उससे पहले हम पूर्व घोषणा पर विश्वास नहीं करेंगे धमाकेदार अंदाज के साथ हम कोई कार्य करेंगे। लखनऊ हमारे प्रदेश की राजधानी है और इसका इतिहास काफी पौराणिक और ऐतिहासिक रहा है इसलिए एकदम से इसका नाम नहीं बदला जाएगा फिलहाल लखनऊ को लखनऊ के नाम से जाना जाएगा हम इस बारे में पूरा विचार कर के सोच समझकर फैसले लेंगे।
वहीं इसे लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि 19वीं सदी में लखनऊ को लखनपुर के नाम से जाना जाता था, यह नगर एक तरफ हमारी प्राचीनतम परंपराओं से जुड़ा हुआ है तो दूसरी ओर आधुनिक काल में भी संस्कृति, साहित्य और कला कौशल का प्रमुख केंद्र है।” बता दें कि लखनऊ के अलावा यूपी के गाजीपुर और बहराइच का नाम बदलने की मांग उठी है। ये मांग सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने की है।

