त्रिपुरा विधानसभा की 60 सीटों पर आज गुरुवार सुबह 7 बजे से जारी वोटिंग खत्म हो गई है। हिंसा की छिटपुट घटनाओं के बीच शाम 4 बजे तक लगभग 81 प्रतिशत वोटिंग हुई। मतदान के दौरान हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक नेता और वाम दल के दो पोलिंग एजेंट सहित कम से कम तीन व्यक्ति घायल हो गए।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग द्वारा इस बार राज्य में कुल 3,337 पोलिंग बूथ बनाए गए थे। त्रिपुरा में एक ही चरण में सभी 60 विधानसभा सीटों पर चुनाव कराए गए हैं। इस चुनाव में राज्य की 28.13 लाख जनता ने 259 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला किया। यह चुनाव 2023 का पहला चुनाव है।
चुनाव के नतीजे 2 मार्च को घोषित होंगे। गौरतलब है कि 2018 में त्रिपुरा में 90% मतदान हुआ था और सरकार भाजपा ने बनाई थी। इसबार बीजेपी 55 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि उसकी सहयोगी आईपीएफटी ने छह सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, एक सीट पर दोनों सहयोगी दलों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
जबकि सीपीएम 47 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि उसकी गठबंधन सहयोगी कांग्रेस 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। टिपरा मोथा ने 42 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। तृणमूल कांग्रेस ने 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं जबकि 58 निर्दलीय उम्मीदवार हैं।
एनडीए को टक्कर दे रही वाम-कांग्रेस गठबंधन
बता दें कि पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और आईपीएफटी (इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा) गठबंधन सत्ता पर कब्जा बरकरार रखने की कोशिश में है। तो वहीं, इस बार वाम-कांग्रेस गठबंधन कर चुनान मैदान में उतरी है और सत्ताधारी भाजपा से सत्ता छीनने की हरसंभव कोशिश कर रही है। क्षेत्रीय संगठन टिपरा मोथा स्वायत्त परिषद चुनावों में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद विधानसभा के चुनाव मैदान में पहली बार उतरी है लेकिन वह भी टक्कर देने की कोशिश कर रही है।

