DIA Report: अमेरिका की रक्षा खुफिया एजेंसी (Defense Intelligence Agency – DIA) ने दक्षिण एशिया में बदलते कूटनीतिक समीकरणों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत, पाकिस्तान, चीन और रूस के बीच संबंधों का गहराई से विश्लेषण किया है। रिपोर्ट में भारत की रणनीतिक सोच, पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की नीति और चीन से उत्पन्न खतरों को लेकर अहम दावे किए हैं।
सबसे बड़ा खतरा चीन और पाकिस्तान
DIA के अनुसार, भारत चीन को अपना मुख्य विरोधी मानता है और रणनीतिक रूप से उसी के अनुसार अपनी नीतियों को दिशा दे रहा है। रिपोर्ट की माने तो भारत, पाकिस्तान को एक “सहायक सुरक्षा समस्या” के रूप में देखता है, जिसे नियंत्रित किया जा सकता है। यह संकेत देता है कि भारत की प्राथमिकता अब सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा नीति पर आधारित है।
DIA Report में पाकिस्तान की नीति भारत विरोधी
DIA ने दावा किया है कि पाकिस्तान, भारत को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है। इसीलिए वह सामरिक परमाणु हथियारों के साथ-साथ सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में लगातार काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने चीन के सहयोग से अपने परमाणु हथियारों की तकनीक में सुधार किया है।
पाकिस्तान के परमाणु हथियारों में चीन की मदद
रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि पाकिस्तान परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण में जुटा है और इसके लिए वह विदेशी आपूर्तिकर्ताओं व बिचौलियों के जरिए आवश्यक तकनीक और उपकरण मंगवाता है। DIA के अनुसार, पाकिस्तान को चीन से तकनीकी और सैन्य समर्थन मिलता है और वह हर साल PLA के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है।
पाकिस्तान का चीनी हथियारों पर बढ़ता भरोसा
रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में भारत से हुई झड़प में पाकिस्तान ने चीनी मूल के J-10C, F-17 फाइटर जेट्स और PL-15 मिसाइलों का प्रयोग किया। साथ ही उसके सामूहिक विनाश के हथियारों से संबंधित सामग्रियां हांगकांग, तुर्की, सिंगापुर और UAE के माध्यम से प्राप्त होती हैं।
भारत-चीन तनाव में थोड़ी राहत, लेकिन समाधान अभी बाकी
DIA ने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच LAC पर कुछ हद तक तनाव कम हुआ है, विशेषकर 2020 के बाद से सेनाओं को सीमित करने का समझौता हुआ है, लेकिन सीमा विवाद अब भी हल नहीं हुआ है।
भारत-रूस संबंध रहेंगे मजबूत, रक्षा क्षेत्र में अब भी निर्भरता
रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को प्राथमिकता देता रहेगा और सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाता रहेगा। हालांकि, भारत अब भी रूसी हथियारों और तकनीकी चीजों पर निर्भर है, खासकर चीन-पाकिस्तान के खतरे को देखते हुए। भारत ने अग्नि-I प्राइम MRBM और अग्नि-V जैसे मिसाइलों का परीक्षण किया है और नई परमाणु पनडुब्बी को भी कमीशन किया है।
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