PM Modi : जाति जनगणना को मिली मोदी कैबिनेट की मंजूरी, CCPA बैठक में लिया गया अहम फैसलाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जाति जनगणना को मूल जनगणना में शामिल करने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय की घोषणा केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की। उन्होंने बताया कि यह फैसला समाज के सामाजिक ताने-बाने और संविधान में निर्धारित संरचना को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
क्या है फैसला?
केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अब जातिगत आंकड़े किसी अलग सर्वेक्षण के जरिए नहीं, बल्कि मूल जनगणना प्रक्रिया का ही हिस्सा होंगे। यानी, भारत सरकार पहली बार 1951 के बाद एक ऐसी जनगणना करेगी जिसमें सभी जातियों की जानकारी आधिकारिक रूप से दर्ज की जाएगी।
कांग्रेस पर निशाना
इस फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा,
“कांग्रेस सरकारों ने जाति जनगणना का विरोध किया है। उन्होंने सिर्फ जाति आधारित सर्वे कराए, जो स्पष्ट और पारदर्शी नहीं थे। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने जातिगत आंकड़ों का उपयोग सिर्फ अपने राजनीतिक लाभ के लिए किया है। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि कई राज्यों ने अपने स्तर पर जातिगत सर्वे किए, लेकिन उनके तरीके एक जैसे नहीं थे, जिससे भ्रम और असमानता फैली।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्ष 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इस विषय पर एक मंत्रियों का समूह गठित किया था ताकि जाति जनगणना पर विचार किया जा सके। अधिकांश राजनीतिक दलों ने जाति जनगणना की सिफारिश भी की थी। बावजूद इसके, उस समय केंद्र सरकार ने जाति जनगणना की जगह केवल सर्वेक्षण तक सीमित रहने का निर्णय लिया।
समाज में पारदर्शिता लाने की कोशिश
अश्विनी वैष्णव (PM Modi) ने कहा कि अलग-अलग राज्यों द्वारा किए गए जातिगत सर्वे कभी-कभी अपारदर्शी होते हैं और समाज में संदेह पैदा करते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि जातिगत आंकड़े सर्वे नहीं, बल्कि एक आधिकारिक जनगणना के माध्यम से इकट्ठा किए जाएं ताकि समाज में भरोसा बना रहे और राजनीति से सामाजिक ताना-बाना प्रभावित न हो, उन्होंने कहा
अन्य कैबिनेट निर्णय
कैबिनेट बैठक में एक अन्य बड़ा फैसला भी लिया गया, जिसके तहत सिलचर से शिलांग और शिलांग से सिलचर तक हाई स्पीड कॉरिडोर हाईवे परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। यह परियोजना मेघालय और असम को आपस में जोड़ने वाली एक रणनीतिक और विकासात्मक योजना है, जिसकी कुल अनुमानित लागत ₹22,864 करोड़ बताई गई है।
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