Noida: नोएडा पुलिस ने बीते माह अवैध रूप से रह रहे 11 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। अब पुलिस को उन दो व्यक्तियों के बारे में अहम जानकारी मिली है जो अवैध रूप से लोगों को भारत में घुसपैठ कराने में मदद कर रहे थे। पुलिस को इन दोनों के नाम और फोन नंबर मिल चुके हैं। इनमें से एक व्यक्ति भारत में मौजूद है, जबकि दूसरा बांग्लादेश में रह रहा है। नोएडा पुलिस इस संबंध में बांग्लादेशी पुलिस से पत्राचार करने की योजना बना रही है।
रात में छिपकर निकलते थे घुसपैठिए
नोएडा पुलिस के अनुसार, बीते माह सलारपुर गांव में रह रहे 11 बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस टीम चेकिंग के दौरान तीन संदिग्ध लोगों को देख उनका पीछा करने लगी। घबराकर वे सलारपुर गांव में स्थित सुमित भाटी के घर की छत पर चढ़ गए। आहट सुनकर सुमित भाटी, उनके परिवार और किरायेदारों ने मिलकर उन्हें घेर लिया। पकड़े जाने के डर से तीनों छत से कूद गए और घायल हो गए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। गिरफ्तार किए गए तीनों की पहचान सद्दाम हुसैन, सुजन और राजरहुल के रूप में हुई।
इनसे हुई पूछताछ में पता चला कि वे बांग्लादेश के रहने वाले हैं और अवैध रूप से भारत में रह रहे थे। उनके पास पहचान से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं मिले। उन्होंने बताया कि उनके आठ अन्य साथी भी सलारपुर गांव में रह रहे हैं। पुलिस ने छापेमारी कर इन आठ लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया। इनमें मोहम्मद फखरुद्दीन उर्फ रोनी, रिहान, मोहम्मद मौमीन, मोहम्मद कामरूल, मोहम्मद कय्यूम, रविउल इस्लाम, राशिल और सोहेल राणा शामिल हैं।
एजेंटों का पता चला, गिरफ्तारी अभियान जारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अवैध रूप से भारत में घुसपैठ कराने वालों की पहचान के लिए एक विशेष टीम बनाई गई थी। पूछताछ और गोपनीय जानकारी के आधार पर दो एजेंटों के नाम सामने आए हैं जो इस कार्य में संलिप्त हैं। इनमें से एक भारत में रह रहा है और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस दिल्ली, पश्चिम बंगाल और कश्मीर समेत अन्य स्थानों पर दबिश दे रही है। जल्द ही नोएडा पुलिस इनके खिलाफ विशेष अभियान चलाने वाली है।
फर्जी दस्तावेजों का सहारा
जांच में पता चला कि बीते आठ से दस महीनों के दौरान अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले अधिकांश लोग 18 से 30 वर्ष की आयु के हैं। वे राजमिस्त्री सहित अन्य श्रमिक कार्यों में कुशल होते हैं। बांग्लादेश में उन्हें प्रतिदिन 250 से 300 रुपये मजदूरी मिलती है, जबकि भारत में वे 1000 रुपये तक कमा सकते हैं। ये लोग आमतौर पर झुग्गियों या ऐसे किराये के मकानों में रहते हैं, जहां दस्तावेजों की सख्त जांच नहीं होती।
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फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले दो भाई गिरफ्तार
पुलिस ने बीते माह दो भाइयों को भी गिरफ्तार किया था, जो बांग्लादेशी नागरिकों के लिए फर्जी आधार कार्ड तैयार कर रहे थे। ये दोनों सेक्टर-39 थाने की पुलिस के हत्थे चढ़े। बिहार निवासी इन दोनों भाइयों ने नोएडा के सलारपुर में ‘सोना कम्युनिकेशन’ नाम से जनसुविधा केंद्र चला रखा था, जहां फर्जी आधार कार्ड बनाए जाते थे।
गिरफ्तार किए गए रोशन और नितेश नामक इन दोनों भाइयों को प्रत्येक फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए 2,000 से 3,500 रुपये तक मिलते थे। पुलिस ने इनके पास से कई फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए हैं। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करने के लिए और भी सख्त कार्रवाई करने जा रही है।

