CAG Report: दिल्ली की पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा लागू की गई आबकारी नीति 2021-22 को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था, जिसके चलते मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई शीर्ष नेताओं को जेल जाना पड़ा। जुलाई 2022 में उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना की सिफारिश पर सीबीआई जांच के बाद इस नीति को रद्द कर दिया गया था। अब मंगलवार, 25 फरवरी 2025 को विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने इस नीति में व्यापक अनियमितताओं का खुलासा किया है।
कैग रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
1. 2,002.68 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, इस नीति की कमजोर संरचना और अपर्याप्त कार्यान्वयन के कारण दिल्ली सरकार को कुल 2,002.68 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
2. लाइसेंस नियमों का उल्लंघन
कुछ थोक विक्रेताओं ने खुदरा विक्रेताओं और निर्माताओं के साथ अवैध संबंध बनाकर दिल्ली के शराब कारोबार का लगभग एक-तिहाई नियंत्रित किया। इससे एकाधिकार और ब्रांड विशेष को बढ़ावा देने का खतरा बढ़ गया।
3. थोक विक्रेताओं का मुनाफा 5% से बढ़ाकर 12% किया गया
मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने थोक विक्रेताओं का लाभ मार्जिन 5% से बढ़ाकर 12% कर दिया। उनका तर्क था कि वैश्विक मानकों को अपनाने, गुणवत्ता जांच प्रणाली विकसित करने और परिवहन लागत को कवर करने के लिए यह कदम आवश्यक था।
4. खुदरा शराब लाइसेंस बिना उचित जांच के जारी किए गए
कैग रिपोर्ट में पाया गया कि खुदरा शराब लाइसेंस बिना सॉल्वेंसी जांच, वित्तीय विवरणों की समीक्षा या आपराधिक पृष्ठभूमि के सत्यापन के जारी किए गए, जिससे संभावित गड़बड़ियों की आशंका बढ़ गई।
5. विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को बदला गया
इस नीति को तैयार करने वाली विशेषज्ञ समिति ने थोक शराब व्यापार को सरकारी एजेंसियों द्वारा नियंत्रित करने की सिफारिश की थी। लेकिन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने इसे निजी कंपनियों को सौंप दिया।
6. शराब के खुदरा व्यापार में एकाधिकार बना रहा
हालांकि इस नीति का उद्देश्य एकाधिकार को खत्म करना था, लेकिन कैग रिपोर्ट के अनुसार, इससे निजी कंपनियों का प्रभुत्व और अधिक बढ़ गया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि:
- तीन निजी थोक विक्रेताओं ने दिल्ली की 71% आईएमएफएल (भारतीय निर्मित विदेशी शराब) और विदेशी शराब की आपूर्ति को नियंत्रित किया।
- 849 शराब दुकानों को सिर्फ 22 निजी कंपनियों को लाइसेंस पर सौंपा गया, जिससे प्रतिस्पर्धा की संभावनाएं सीमित हो गईं।
7. राजस्व संबंधी निर्णय बिना मंजूरी के लिए गए
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, इस नीति से जुड़े कई आर्थिक फैसले मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल की मंजूरी या उपराज्यपाल की राय लिए बिना ही लिए गए।
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8. गुणवत्ता मानकों की अनदेखी
आबकारी विभाग ने उन कंपनियों को लाइसेंस जारी कर दिए, जो भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानकों का पालन नहीं कर रही थीं। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि 51% विदेशी शराब परीक्षण रिपोर्ट या तो उपलब्ध नहीं थीं या एक साल से अधिक पुरानी थीं।

