Noida News: बिजली कंपनियों के निजीकरण से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को पूरे देश में एक दिन का विरोध प्रदर्शन करने के बाद सोमवार को कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। इसी दिन कंसल्टेंट की नियुक्ति के लिए टेंडर नोटिस जारी होने से कर्मचारियों का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने काली पट्टी बांधकर कार्यस्थलों पर एक सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया।
उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (वीकेएसएसएस) के आह्वान पर नोएडा और गाजियाबाद के 2,000 से अधिक कर्मचारियों ने सोमवार को काली पट्टी बांधकर प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। बिजली कर्मचारी विद्युत वितरण निगम के निजीकरण और निजी कंसल्टेंट की नियुक्ति के विरोध में अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। वीकेएसएसएस ने कहा है कि निजीकरण का फैसला वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार ने हड़ताल पर लगाया प्रतिबंध
कर्मचारियों के रुख को देखते हुए राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) और उसकी पांच पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों के कर्मचारियों के हड़ताल पर छह महीने का प्रतिबंध लगा दिया है। एस्मा (आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम) के प्रावधानों के तहत लागू यह प्रतिबंध सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के सभी कर्मचारियों पर लागू होता है। कर्मचारियों का तर्क है कि प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान निजीकरण के टेंडर जारी करना एक बड़ी और सुनियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।
संघर्ष समिति ने उठाए गंभीर सवाल
प्रदर्शन के दौरान संघर्ष समिति ने ऊर्जा निगम द्वारा नया कंसल्टेंट नियुक्त करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि निगम क्या साबित करना चाहता है और यह क्यों जरूरी है। समिति ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने पहले ही सब कुछ फाइनल कर लिया है और मौजूदा प्रक्रिया महज औपचारिकता है। उन्होंने इस तरह के कदम उठाने से पहले विद्युत वितरण निगम का उचित मूल्यांकन न किए जाने पर भी चिंता जताई।
विरोध दिवस पर प्रदेश भर में रैलियां निकाली गईं
शुक्रवार को विरोध दिवस के दौरान लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, बांदा, गोरखपुर, आजमगढ़, बस्ती, अयोध्या, देवीपाटन, सुल्तानपुर, आगरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, झांसी, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद और बरेली में महत्वपूर्ण रैलियां निकाली गईं। संघर्ष समिति ने 13 जनवरी को विरोध रैलियां निकालने और कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताने की योजना की घोषणा की थी। गौरतलब है कि निजीकरण की चर्चा फिलहाल दो डिस्कॉम- पीयूवीवीएनएल और डीवीवीएनएल (पूर्वांचल और दक्षिणांचल) पर केंद्रित है। हालांकि संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि इस फैसले का असर पूरे उत्तर प्रदेश पर पड़ेगा और समिति के साथ किए गए समझौतों का उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक बार सरकार और प्रबंधन इन क्षेत्रों की बिजली कंपनियों का निजीकरण कर देंगे तो जल्द ही पूरे प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों का निजीकरण हो जाएगा।

