One Nation One Election Bill: ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक को मतदान के बाद लोकसभा में पेश किया गया। सदन में 269 सांसदों ने विधेयक पेश करने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि 198 ने इसके खिलाफ मतदान किया। विधेयकों को दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास भेजा गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सुझाव के बाद, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से विधेयक को व्यापक विचार-विमर्श के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजने का अनुरोध किया।
बिल को जेपीसी के पास क्यों भेजा गया?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक के संबंध में लोकसभा में बयान दिया। विधेयक पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा, “जब इस संविधान संशोधन विधेयक पर कैबिनेट में चर्चा हुई, तो प्रधानमंत्री ने ही सुझाव दिया था कि इसे जेपीसी के पास भेजा जाना चाहिए। सभी स्तरों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।” अमित शाह ने आगे कहा, “इसलिए मेरा मानना है कि सदन का ज्यादा समय बर्बाद किए बिना अगर मंत्री जी कहते हैं कि वे इसे जेपीसी को भेजने के लिए तैयार हैं, तो जेपीसी में सारी चर्चा होगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट इसे पास कर देगी। फिर भी इस पर फिर से पूरी चर्चा होगी।”
अमित शाह के बाद कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि नियम 74 के तहत वे इस बिल के लिए जेपीसी के गठन का प्रस्ताव रखेंगे। विपक्ष ने किया हंगामा, क्या थे उनके तर्क? कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एएनआई से बात करते हुए कहा, “एक राष्ट्र, एक चुनाव बिल तो बस पहला मील का पत्थर है, असली मकसद नया संविधान लाना है। संविधान में संशोधन करना एक बात है, लेकिन नया संविधान लाना आरएसएस और पीएम मोदी का असली एजेंडा है।” इस बीच, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि यह संविधान और लोगों के वोट के अधिकार पर हमला है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने बिल का विरोध करते हुए भाषण दिए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह फैसला सच्चे लोकतंत्र के लिए हानिकारक साबित होगा।

