Greater Noida: उत्तर प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग ने 10 से 15 साल पुराने मामलों में उद्यमियों को नोटिस भेजकर टैक्स जमा करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि अगर टैक्स जमा नहीं किया गया, तो आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के तहत कई उद्यमियों के बैंक खाते भी सीज किए जा चुके हैं। उद्यमियों ने इसे गलत ठहराते हुए इसका विरोध किया है।
हजारों-लाखों रुपये का टैक्स बकाया
जीएसटी विभाग ने पिछले एक से दो महीने में 100 से अधिक उद्यमियों को नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिस में 10 से 15 साल पुराने मामलों का हवाला देते हुए टैक्स और जुर्माना जमा करने का आदेश दिया गया है। विभाग ने उद्यमियों से हजारों-लाखों रुपये के टैक्स जमा करने को कहा है। इसके साथ ही टैक्स जमा न करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई है।
दस्तावेज न होने से बढ़ी परेशानी
उद्यमी संगठन नेशनल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (एनईए) के महासचिव वीके सेठ ने विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “10 से 15 साल पुराने मामलों में उद्यमियों के पास टैक्स भुगतान के दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में वे यह कैसे साबित करें कि टैक्स जमा कर दिया गया था?” उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग खुद अपने रिकॉर्ड को ठीक से संभालने में नाकाम रहा है और अब उद्यमियों को परेशान कर रहा है।
बैंक खाते सीज, बढ़ी आर्थिक मुश्किलें
कुछ उद्यमियों के बैंक खाते सीज किए जाने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। इससे उनके कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है। उद्यमियों ने अपनी परेशानियों को जीएसटी विभाग के कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर के सामने भी रखा है।
ये भी पढें..
नोटिस के खिलाफ विरोध
उद्यमियों ने विभाग की इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए विरोध किया है। उनका कहना है कि इतने पुराने मामलों में टैक्स जमा करने का दबाव बनाना गलत है। इस मुद्दे को लेकर जल्द ही संगठन सरकार से भी अपील कर सकता है।

