Noida: फंड डायवर्जन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, ईडी ने नोएडा प्राधिकरण को एक पत्र लिखते हुए वर्ष 2010 से 2012 तक वहां तैनात अफसरों की लिस्ट मांगी है। इस पत्र के जारी होते ही प्राधिकरण में पहले से तैनात रहे अफसरों से लेकर वर्तमान में कार्यरत अधिकारियों तक में हलचल मच गई है।
कैसे बढ़ा मामला?
नोएडा के एक प्रमुख बिल्डर के प्रोजेक्ट “लोटस 300” में रजिस्ट्री की समस्या ने इस मामले को और गंभीर बना दिया। इस परियोजना के निवासियों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद, जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि बिल्डर को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्राधिकरण के कुछ पूर्व अधिकारियों ने फंड डायवर्जन किया था। बताया जा रहा है कि यह घटनाक्रम बसपा शासनकाल के दौरान हुआ था, जब सरदार मोहिंदर सिंह नोएडा प्राधिकरण के सीईओ के पद पर थे। उस दौरान प्राधिकरण में करोड़ों रुपये के घोटाले की बात सामने आई थी।
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190 करोड़ रुपये का फंड डायवर्जन
ईडी की जांच में अब तक यह सामने आया है कि इस घोटाले में लगभग 190 करोड़ रुपये का फंड डायवर्जन हुआ था। इसी क्रम में, ईडी की टीम ने पूर्व सीईओ सरदार मोहिंदर सिंह के घर छापा मारा, जहां जांच के दौरान हजारों करोड़ रुपये के अवैध संपत्तियों का पता चला, जिसे कब्जे में लिया गया। इसके बाद ईडी ने नोएडा प्राधिकरण से वर्ष 2010 से 2012 तक के दौरान तैनात अफसरों की सूची अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

