Odisha Cyclone: बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘दाना’ ने अब अपनी रफ्तार पकड़ ली है। गुरुवार सुबह से ही ओडिशा के तटीय इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, साइक्लोन दाना 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ रहा है और इसके शुक्रवार सुबह ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों को पार करने की संभावना है।
ओडिशा पर सबसे ज्यादा असर
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवाती तूफान गुरुवार-शुक्रवार की रात को भितरकनिका नेशनल पार्क और धामरा पोर्ट के पास टकराएगा, जो पुरी से सटे हुए हैं। इस दौरान 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। तूफान का सबसे ज्यादा असर ओडिशा में देखने को मिलेगा। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, तूफान के पहले 10 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की योजना है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी ने बताया कि बुधवार सुबह तक 30 प्रतिशत लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था।
रेलवे और राहत कार्य
तूफान की गंभीरता को देखते हुए रेलवे ने 200 से ज्यादा ट्रेनें कैंसिल कर दी हैं। इसके साथ ही एनडीआरएफ की 56 टीमें ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तैनात की गई हैं, जिनमें से 21 टीमें ओडिशा और 17 पश्चिम बंगाल में काम कर रही हैं।
ओडिशा पर बार-बार क्यों आता है तूफान?
ओडिशा की जियोग्राफी और बंगाल की खाड़ी का उष्णकटिबंधीय तापमान इस राज्य को चक्रवातों के लिए बेहद संवेदनशील बनाता है। बंगाल की खाड़ी का पानी अरब सागर के मुकाबले ज्यादा गर्म होता है, जिससे यहां चक्रवाती तूफानों की आशंका बढ़ जाती है। ओडिशा की तटरेखा मुड़ाव वाले इलाके में स्थित है, जिसके चलते तूफानों का रुख अक्सर यहां की ओर होता है।
ओडिशा की तैयारियां
ओडिशा ने 1999 में आए ‘सुपर साइक्लोन’ से काफी कुछ सीखा है, जिसने राज्य में भारी तबाही मचाई थी। इसके बाद ओडिशा सरकार ने डिजास्टर मैनेजमेंट को मजबूत किया और ‘जीरो कैजुअलिटी’ का लक्ष्य रखा। ओडिशा स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (OSDMA) का गठन किया गया, जो देश की पहली राज्यस्तरीय डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी बनी।
सरकार ने जमीनी स्तर पर जाकर लोगों को प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की ट्रेनिंग दी। साथ ही, इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए तटीय इलाकों में रोड नेटवर्क, शेल्टर होम्स, तटबंध और मॉनिटरिंग टॉवर का निर्माण किया गया है। वॉर्निंग सिस्टम के जरिए तटीय गांवों को पहले से सतर्क किया जाता है, जिससे जानमाल का नुकसान कम किया जा सके।
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सुपर साइक्लोन से सबक लेकर बेहतर रणनीति
ओडिशा सरकार ने 2013 के ‘फैलिन’ और 2019 के ‘फैनी’ तूफानों में अपने प्रबंधन कौशल का प्रदर्शन किया, जिससे हजारों लोगों की जान बचाई जा सकी। सरकार ने पहले से ही बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर तूफान के खतरों से निपटने के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं।

