Noida: गौतमबुद्ध नगर के सुपरटेक इको विलेज-2 में दूषित पानी पीने से 300 से अधिक लोग बीमार हो गए हैं, जिनमें 170 से अधिक बच्चे शामिल हैं। इस गंभीर मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा समेत अन्य अधिकारियों को “कारण बताओ नोटिस” जारी किया है। अधिकारियों को आगामी सुनवाई से एक सप्ताह पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
दूषित पानी में ई. कोली और ब्लीचिंग पाउडर की मिलावट
यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित सुपरटेक इको विलेज-2 में दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पानी में ई. कोली बैक्टीरिया और ब्लीचिंग पाउडर की मिलावट पाई गई, जिससे निवासियों को उल्टी, दस्त और बुखार जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। बच्चों पर इसका विशेष असर हुआ, जिससे कई परिवारों में चिंता का माहौल बन गया।
एनजीटी की सख्त कार्रवाई
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अगुवाई में मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर मानते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया है। एनजीटी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले की जांच कर दूषित पानी की आपूर्ति के स्रोत का पता लगाएं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
जिला प्रशासन और प्रदूषण बोर्ड से मांगा जवाब
एनजीटी ने केंद्रीय और राज्य स्तर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन से यह भी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो। सभी अधिकारियों को इस पर 28 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
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निवासियों में आक्रोश
इस घटना के बाद सोसायटी के निवासियों में आक्रोश व्याप्त है। वे प्राधिकरण से उचित जल आपूर्ति और स्वास्थ्य सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। निवासियों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं की गई, जिसके कारण यह संकट उत्पन्न हुआ।

