इस समय जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwarananda Saraswati) “गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा” पर है लेकिन इस बीच उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. बता दें कि नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा को लेकर शंकराचार्य स्वामी को राज्य सरकारों ने उन्हें वापस लौटने को कहा था. तो वहीं अब नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में विरोध के बाद अब मेघालय में भी शंकराचार्य स्वामी महाराज की “गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा” का विरोध शुरू हो गया है. बता दें कि पूर्वी खासी हिल्स जिले के जिला मैजिस्ट्रेट ने धारा 163 BNSS के तहत मनाही-हुक्म जारी कर जिले में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया है.
सूत्रों के अनुसार, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज को मेघालय राज्य में उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बात करें तो, मेघालय में इस यात्रा को लेकर हो रहे विरोध को देखते हुए राज्य सरकार ने यह फैसला किया है. बता दें कि शंकराचार्य स्वामी को ‘गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा’ के तहत शनिवार को मेघालय पहुंचना था, अपनी यात्रा के लिए जो गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर निकाली जा रही है. तो वहीं राज्य की सरकार ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को सूचित किया है कि वह शंकराचार्य के चार्टर्ड विमान को उतरने की अनुमति न दे.
ये भी पढ़ें…
Babita Phogat on Vinesh Phogat: बबीता फोगाट ने बहन विनेश फोगाट की राजनीति को लेकर कही ये बात
नागालैंड-अरुणाचल में भी एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकल पाए
तो वहीं आपको बता दें कि इससे पहले शंकराचार्य के शुक्रवार 27 सितंबर को ही पहुंचने की खबर मिलने के बाद से कई ग्रुप के सदस्य उस वक्त शिलांग हवाई अड्डे पर पहुंच गए थे. जहां पर विरोध किया गया. ऐसे में मीडिया से बात करते हुए इन लोगों ने बताया कि असम को छोड़कर पूर्वोत्तर के सभी लोगों के लिए गोमांस मुख्य भोजन का हिस्सा है और वे यह बर्दाश्त नहीं करेंगे कि कोई भी उन्हें बताए कि उन्हें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए. तो वहीं आगे गुरुवार 26 सितंबर को उत्तराखंड में ज्योतिर मठ पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के चार्टर्ड विमान को अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में उतरने की अनुमति तो दी गई, लेकिन अधिकारियों के अनुरोध के बाद वे हवाई अड्डे से बाहर नहीं निकल पाए, क्योंकि अधिकारियों ने उनसे कहा था कि ऐसा करने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है.
यात्रा का अरुणाचल में छात्र संगठन ने किया विरोध
बता दें कि अरुणाचल प्रदेश के होलोंगी के डोनी पोलो हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद शंकराचार्य को अखिल अरुणाचल प्रदेश छात्र संघ के सदस्यों के विरोध का सामना करना पड़ा था. जिसके बाद वे दीमापुर गए और शनिवार को कोहिमा में एक गौ रक्षा कार्यक्रम को संबोधित करने वाले थे, लेकिन उन्हें वहां से भी खाली हाथ लौटना पड़ा. बता दें कि इस महीने की शुरुआत में 35 राज्यों में गौ रक्षा अभियान पर जाने का संकल्प लेते हुए शंकराचार्य ने कहा था कि, “हम 100 करोड़ हिंदुओं की ओर से सरकार से कहना चाहते हैं कि गौ हत्या बंद होनी चाहिए और इस पर एक कानून बनाया जाना चाहिए.” इसी के साथ ही गाय को राष्ट्रमाता घोषित करना होगा.

