One-Nation-One-Election: केंद्र की सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल के सौ दिन पूरे कर लिए हैं, जिसके चलते एक बार फिर से वन नेशन-वन इलेक्शन की हलचल शुरू हो गई है. आपको बता दें कि सरकार के सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई है कि केंद्र सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल में ही इस नियम को लागू करेगी. इसके लिए सरकार जल्द से जल्द संसद में विधेयक लाने की तैयारी कर रही है. तो वहीं वन नेशन-वन इलेक्शन को लेकर विपक्ष की भी आवाज उठने लगी है. इसी क्रम में कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर वन नेशन, वन इलेक्शन को लेकर जमकर निशाना साधा है.
इंडिया गठबंधन वन नेशन-वन इलेक्शन के खिलाफ है
सोमवार को माडिया से वन नेशन, वन इलेक्शन पर बात करते हुए पी. चिदंबरम ने कहा कि, मौजूदा संविधान के तहत वन नेशन-वन इलेक्शन संभव नहीं है. इस नियम के लिए एक या दो नहीं बल्कि कम से कम पांच संवैधानिक संशोधनों की आवश्यकता है. पीएम मोदी के पास लोकसभा या राज्यसभा में इन संवैधानिक संशोधनों को पेश करने के लिए बहुमत भी नहीं है. उन्होंने इस पर जोर देकर कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन के लिए संवैधानिक बाधाएं और भी बड़ी हैं. ये बिल्कुल भी संभव नहीं है. इंडिया गठबंधन पूरी तरह से वन नेशन-वन इलेक्शन खिलाफ है.
चिदंबरम का पीएम के शाही परिवार वाले बयान पर पलटवार
रविवार 15 सितंबर को पीएम मोदी ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक रैली को संबोधित किया था जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था. पीएम मोदी ने कहा था कि “उसका शाही परिवार दलितों के लिए आरक्षण खत्म करना चाहता है. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि जब तक वह सत्ता में हैं, तब तक वह अंबेडकर के दिए गए आरक्षण का एक अंश भी लूटने या खत्म नहीं होने देंगे.”
तो वहीं इस पर चिदंबरम ने पलटवार करते हुए आरोप को खारिज कर दिया है. चिदंबरम ने चुटीले अंदाज में कहा, हमें आरक्षण क्यों खत्म करना चाहिए? एक तरफ हम ही कह रहे हैं कि 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा को खत्म किया जाना चाहिए और हम ही जाति जनगणना की मांग भी कर रहे हैं. बल्कि हम ये कह रहे हैं कि आरक्षण जनसंख्या के हिसाब से होना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि लोग उनकी हर बात पर विश्वास न करें.
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बार-बार चुनाव से देश के विकास में बाधा- पीएम मोदी
बता दें कि पिछले महीने स्वतंत्रता दिवस के पर अपने संबोधन में पीएम मोदी ने वन नेशन-वन इलेक्शन की जोरदार वकालत की थी और कहा था कि बार-बार चुनाव देश के आगे बढ़ने में बाधा बन रहा है. तो वहीं पीेम मदोी के इस बयान के बाद से राजनीतिक गलियरों में चर्चा शुरू हो गई कि सरकार जल्द ही इसपर कोई फैसला ले सकती है. ऐसे में अब इन दिनों भी चर्चा यही है कि सरकार संसद में वन नेशन, वन इलेक्शन पर विधेयक लाने की तैयारी कर रही है.
क्या है वन नेशन-वन इलेक्शन?
जैसा कि भारत में इस समय राज्यों के विधानसभा और देश के लोकसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं। तो वहीं वन नेशन वन इलेक्शन का मतलब है कि पूरे देश में एक साथ ही लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव करवना। यानी की मतदाता लोकसभा और राज्य के विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय पर या चरणबद्ध तरीके से अपना वोट डालेंगे।

