PM Modi Birthday: अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह का महत्व सिर्फ मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि दूसरे समुदायों के लोगों के लिए भी है। इसे भारत में मुसलमानों के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। आगामी 17 सितंबर को ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाया जाएगा।
दरगाह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन की तैयारियां जोरों पर हैं। दरगाह के खादिम सैयद अफशान चिश्ती ने अन्य संरक्षकों के साथ मिलकर इस आयोजन की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के खास मौके पर दरगाह पर खाना बनाने के लिए शाही अकबरी देग (बड़ा खाना पकाने का बर्तन) का इस्तेमाल किया जाएगा।
पीएम मोदी के नाम एक और रिकॉर्ड
यह व्यंजन जायरीनों के लिए बेहद खास माना जाता है। इस देग में 4,000 किलोग्राम सूखे मेवों से बनी मीठी शाकाहारी डिश तैयार की जाएगी। इसे सभी जायरीनों और आगंतुकों में बांटा जाएगा। यह पहली बार होगा जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री का जन्मदिन ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की प्रसिद्ध सूफी दरगाह पर इतने बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर कार्यक्रम का आयोजन चिश्तिया फाउंडेशन और अन्य संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। दरगाह पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जायरीनों के आने की उम्मीद है। पीएम मोदी के जन्मदिन पर तैयार किए गए विशेष पकवान को जायरीनों और आस-पास के इलाकों के लोगों को लंगर के तौर पर बांटा जाएगा।
पीएम मोदी के 74वें जन्मदिन पर तैयार होगा लंगर
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 74वां जन्मदिन 17 सितंबर को है। उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था। हर साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उर्स (वार्षिक उत्सव) के दौरान ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर चादर चढ़ाते हैं। पीएम मोदी की अजमेर स्थित दरगाह के प्रति गहरी श्रद्धा है।
यह भी पढ़ें: Greater Noida: NXP सेमीकंडक्टर्स का भारत में बड़ा निवेश, 1 बिलियन डॉलर से अधिक R&D में होंगे खर्च
इस संबंध में दरगाह के खादिम सैयद अफशान चिश्ती ने बताया कि दरगाह पर 550 वर्षों से शाकाहारी भोजन बनाने की परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर दरगाह की सबसे बड़ी देग में चावल, चीनी, केसर और सूखे मेवों का उपयोग करके विशेष पकवान तैयार किया जाएगा।
‘550 वर्ष पुरानी है शाकाहारी लंगर की परंपरा’
सैयद अफशान चिश्ती ने बताया कि यह पकवान जायरीनों में बांटा जाएगा और आस-पास के इलाकों में भी लंगर सेवा के तौर पर भेजा जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि पिछले 550 वर्षों से इस देग में केवल शाकाहारी लंगर ही तैयार किया जाता रहा है।
सैयद अफशान चिश्ती के अनुसार इस दरगाह पर हमेशा शाकाहारी लंगर ही बनता रहा है और इसमें प्याज का भी उपयोग नहीं किया जाता। इसकी वजह यह है कि बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु भी ख्वाजा गरीब नवाज के प्रति श्रद्धा रखते हैं। न केवल वे बल्कि सभी धर्मों के लोग यहां आते हैं और बड़ी श्रद्धा के साथ लंगर में हिस्सा लेते हैं।

