दिल्ली शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी को एक और बड़ी सफलता मिली है। पार्टी के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर को मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी। शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी नागरिक की लिबर्टी पवित्र होती है। सख्त से सख्त कानून मामले में भी इसका आदर किया जाना चाहिए। नायर की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि जेल अपवाद है जबकि बेल एक नियम है।
23 महीने से जेल में है नायर
ज्ञात हो कि कथित दिल्ली शराब मामले में आप के पूर्व संचार प्रभारी 13 नवंबर 2022 से जेल में बंद हैं। मामले में उनके सह आरोपी मनीष सिसोदिया और कविता को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। नायर पिछले 23 महीने से सलाखों के पीछे है। इस मामले में अधिकतम सजा का प्रावधान 7 साल की कैद है। मामले में सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी भी नागरिक को जीवन और लिबर्टी का अधिकार है। कड़े से कड़े मामलों में भी इसका पालन होना चाहिए।
दिल्ली शराब मामले में ED की दलीलें खारिज
दिल्ली शराब मामले में नायर पिछले 23 महीनों से जेल में हैं। इस दौरान ट्रायल शुरू नही हुआ है। ऐसे में उन्हें जेल में नहीं रखा जा सकता है। ऐसे मामलों में दोषी को अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान है। बेल नियम और जेल अपवाद के सिद्धांत को मानते हुए अगर आरोपी को इस तरह से जेल में रखा जाए तो है यह सिद्धांत पराजित हो जाएगा। शीर्ष अदालत ने ED की टि्वन कंडिशन वाली दलील को भी खारिज कर दिया।

