Noida: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को हजारों घर खरीदारों की पीड़ा के प्रति उनकी उदासीनता के लिए कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने अफसोस जताया कि वर्षों से अपने अपार्टमेंट मिलने का इंतजार कर रहे इन घर खरीदारों के हितों की तुलना में अधिकारियों ने रियल एस्टेट डेवलपर्स से बकाया राशि की वसूली को प्राथमिकता दी है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि “आपको घर खरीदारों की चिंता नहीं है। प्राधिकरण और रियल एस्टेट डेवलपर्स के बीच जो भी हुआ, उसके परिणाम भुगतने वाले अंततः घर खरीदार ही हैं।”
यमुना प्राधिकरण को हलफनामा दाखिल करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने यमुना प्राधिकरण (यीडा) को कड़ी फटकार लगाते हुए एक हलफनामा दायर करने को कहा है। इस हलफनामे में प्राधिकरण को यह बताना होगा कि उसने घर खरीदारों को क्या मौद्रिक और अन्य रियायतें दी हैं। इसके अलावा, जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के साथ किए गए रियायत समझौते के दौरान घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों का विवरण भी प्रस्तुत करना होगा।
नोएडा के अधिकारियों को भी ठहराया जिम्मेदार
आईबीसी (दिवालियापन और दिवालियापन संहिता) के तहत अधिकतर प्रोजेक्ट नोएडा में हैं, जिसके लिए नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने जो योजनाएं बनाई, वे केवल बिल्डरों के हित में थीं और उन्होंने कभी भी फ्लैट खरीदारों की परवाह नहीं की। इसी के चलते आज भी हजारों घर खरीदार परेशान हैं।
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घर खरीदारों के अधिकारों की उपेक्षा पर टिप्पणी
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने घर खरीदारों के अधिकारों की व्यवस्थागत उपेक्षा पर भी टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि “उन्हें फ्लैट खरीदारों की कोई चिंता नहीं है,” और मुआवजे के दावों को लेकर कर्ज में डूबी जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) के लिए यमुना प्राधिकरण की समाधान योजना पर कड़ी आलोचना की।

