Noida: नोएडा पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए एक फर्जी आईपीएस अफसर को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि यह आरोपी महज 10वीं पास है, लेकिन उसके ठगी के तरीके ने नोएडा के अनुभवी आईपीएस अधिकारियों को भी चौंका दिया। आरोपी जंगल में बैठकर लोगों को फोन कर ठगी करता था। पुलिस ने मामले का खुलासा किया है और दावा किया है कि जल्द ही पूरे गैंग का पर्दाफाश किया जाएगा।
ऐप को बनाया दफ्तर, किया फर्जीवाड़ा
डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि आरोपी धीरेन्द्र यादव मात्र 10वीं कक्षा तक पढ़ा है और पिछले एक साल से आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त है। धीरेन्द्र ने यूपी कॉप (UP COP) ऐप का उपयोग करके विभिन्न थानों और जनपदों से मारपीट और अपहरण जैसी धाराओं के तहत फर्जी एफआईआर डाउनलोड की। इसके बाद वह शिकायतकर्ताओं के मोबाइल नंबर हासिल कर उनसे घटना की जानकारी लेता और अभियुक्त की गिरफ्तारी के नाम पर पैसे की मांग करता था। ठगी के दौरान वह ऑनलाइन पेमेंट माध्यम जैसे क्यूआर कोड और यूपीआई का उपयोग करता था।
जंगल में जाकर करते थे ठगी
डीसीपी अवस्थी ने बताया कि यदि कोई शिकायतकर्ता पैसे देने से मना करता तो धीरेन्द्र उसे धमकी देता कि वह उसके केस की फाइल दबा देगा और कोई कार्यवाही नहीं होने देगा। धीरेन्द्र ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि उसके गांव के करीब 7-8 अन्य लड़के भी इसी तरह की ठगी में शामिल हैं। वे लोग जंगल में जाकर यूपी कॉप ऐप से एफआईआर निकालते हैं और अपने टारगेट तय कर शिकायतकर्ताओं से संपर्क करते हैं।
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फर्जी सिम का इस्तेमाल
धीरेन्द्र के पास जो सिम थी, वह भी फर्जी थी और उसने इसे अपने गांव के पुष्पेन्द्र यादव से ली थी। ठगी के दौरान वह हर ट्रांजक्शन में पुष्पेन्द्र यादव के बैंक खाते का इस्तेमाल करता था और इसके बदले में उसे 20 प्रतिशत कमीशन देता था। नोएडा के फेस-1 थाने में दर्ज एक केस में धीरेन्द्र यादव ने शिकायतकर्ता से केस को खत्म करने के नाम पर 1000 रुपये की मांग की थी। पुलिस ने इस मामले में भी मुकदमा दर्ज किया है और अब धीरेन्द्र के अन्य साथियों और फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले पुष्पेन्द्र यादव की तलाश कर रही है।

