UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीच वाक युद्ध जोर पकड़ता जा रहा है। अखिलेश यादव ने केशव प्रसाद मौर्य पर तीखा प्रहार करते हुए सवाल उठाया है कि यदि मौर्य सही काम कर रहे होते, तो राज्य में दो ‘उपमुख्यमंत्री’ की क्या जरूरत पड़ती? उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि मौर्य का काम सिर्फ स्तुतिगान करना रह गया है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा, “कोई ‘उप’ डबल हार के ‘उपहार’ के बाद भी डबल इंजन का प्रशंसा-प्रमाणपत्र बांट रहे हैं। अगर माननीय सही काम कर रहे होते तो दो ‘उप मुख्यमंत्री’ की क्या जरूरत पड़ती। इसका मतलब या तो वो सही काम नहीं कर रहे हैं या फिर बाकी दो बेकाम हैं, नाकाम हैं।” उन्होंने आगे कहा कि यदि उपमुख्यमंत्री सच में उपयोगी होते, तो दिल्ली में भी होते, लेकिन वहां नहीं हैं।
इस वाक युद्ध में अब कांग्रेस भी कूद गई है। कांग्रेस के प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने केशव प्रसाद मौर्य पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पिछड़ों के हितों और उनके अधिकारों से समझौता कर लिया है। अवस्थी ने कहा, “यह पहली बार नहीं है जब केशव प्रसाद मौर्य ने पिछड़ों के अधिकारों को सरकार के सामने सरेंडर किया है। इससे पहले भी उन्हें अपमानित किया गया, लेकिन उन्होंने हर बार इसे सहन किया।”
कांग्रेस ने मौर्य पर यह भी आरोप लगाया कि वह योगी आदित्यनाथ के सामने पूरी तरह से सरेंडर हो गए हैं और भाजपा में पिछड़ों की स्थिति को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाया।
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इससे पहले, केशव प्रसाद मौर्य ने बंगाल में हुए दुष्कर्म मामले में अखिलेश यादव पर हमला किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि अखिलेश यादव बलात्कारियों के पैरोकार बन गए हैं और उन्हें राजनीति छोड़कर उनका वकील बन जाना चाहिए। मौर्य ने कहा, “अखिलेश यादव जब 2012 से 2017 तक मुख्यमंत्री थे, तब उत्तर प्रदेश की हालत बदतर थी। अब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार भी वही स्थिति पैदा कर रही है।”

