उत्तर प्रदेश के Noida में फर्जीबाड़ा का मामला सामने आया है। एक्सप्रेसवे थाने की पुलिस ने किराएदारों और घरेलू कामगारों के फर्जी पुलिस सत्यापन बनाने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों ने पुलिस कमिश्नर की जगह एसएसपी की सील का इस्तेमाल किया, जिसके चलते उन्हें पकड़ लिया गया।
130 से ज्यादा लोगों को ठग चुके है आरोपी
गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में रजनीश चौहान (मंगरौली), राहुल चौहान (छपरौली) और अमित कुमार (मंगरौली) हैं। वे फॉर्म के लिए 50 रुपये और सत्यापन के लिए 400 रुपये लेते थे। अब तक 130 से ज्यादा लोगों को ठग चुके हैं। Noida पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन लैपटॉप, एक एसएसपी सील, दो मोबाइल फोन, 32 खाली फॉर्म और 130 पुलिस सत्यापन फॉर्म बरामद किए हैं। उन्होंने छपरौली गांव में एक ऑफिस भी बना रखा था।
ऐसे हुआ फर्जीबाड़ा का खुलासा
पुलिस ने बताया कि एजेंटों के जरिए वे किराएदारों और घरेलू कामगारों से संपर्क करते थे और एक से दो दिन में पुलिस सत्यापन तैयार कर लेते थे। डीसीपी राम बदन सिंह ने बताया कि शहर में किराएदारों और घरेलू कामगारों के पुलिस सत्यापन का अपडेट चल रहा था, इसी दौरान यह अहम खुलासा हुआ। डीसीपी ने बताया कि जब पुलिस अधिकारी सेक्टर 168 में लोटस ज़िंग सोसाइटी में कर्मचारियों से जानकारी सत्यापित करने के लिए गए, तो उन्हें फर्जी पुलिस सत्यापन का पता चला।
ग्राहक बनकर Noida पुलिस ने की छापामारी
कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने छपरौली गांव की एक दुकान से दस्तावेज प्राप्त किए थे। ग्राहक बनकर पुलिस अधिकारी दुकान पर गए, जहाँ जालसाजों ने सत्यापन के लिए पैसे मांगे। इसके बाद Noida पुलिस ने तीनों व्यक्तियों को गिरफ्तार कर थाने ले आई। उनके नेटवर्क और एसएसपी सील के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

