राजेंद्र नगर स्थित कोचिंग सेंटर में हुई घटना के लिए DM ने एमसीडी के भवन एवं निर्माण विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। डीएम ने अग्निशमन विभाग के अधिकारियों पर बिल्डिंग बायलॉज की अनदेखी करने और कोचिंग सेंटर संचालकों पर अपने फायदे के लिए छात्रों की जान जोखिम में डालने का आरोप लगाया है। साथ ही डीएम ने एमसीडी की कार्यप्रणाली पर कई कठोर टिप्पणियां की हैं। घटना की जांच के बाद मध्य जिला डीएम (जी. सुधाकर) ने अपनी रिपोर्ट संभागीय आयुक्त मनीष गुप्ता को सौंपी। जांच के दौरान डीएम ने एमसीडी के करोल बाग जोन के भवन एवं निर्माण विभाग, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कोचिंग सेंटर के दो छात्रों समेत कुल 15 लोगों के बयान दर्ज किए। डीएम ने बिल्डिंग प्लान, फायर एनओसी और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की।
बिना फायर एनओसी के बिल्डिंग प्लान मंजूर
जांच में ता चला कि एमसीडी ने बिना फायर एनओसी के बिल्डिंग प्लान मंजूर कर दिया था। फायर डिपार्टमेंट ने शुरू में दावा किया था कि बिल्डिंग की ऊंचाई 15 मीटर से कम है, इसलिए फायर डिपार्टमेंट के संदर्भ की जरूरत नहीं है। हालांकि, मास्टर प्लान 2021 के प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी इमारत का उपयोग शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है और उसकी ऊंचाई 9 मीटर से अधिक है, तो फायर एनओसी प्राप्त करना अनिवार्य है।
रिपोर्ट में एमसीडी के रवैये पर सवाल
DM ने कहा कि इमारत के आर्किटेक्ट, मालिक और बिल्डर ने फायर एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया, जो वाणिज्यिक उपयोग के लिए आवश्यक थी। उस समय, नॉर्थ एमसीडी ने कोई कमी ज्ञापन जारी नहीं किया या मामले पर स्पष्टीकरण नहीं मांगा। डीएम ने इसे बिल्डिंग डिपार्टमेंट के अधिकारियों द्वारा एक महत्वपूर्ण चूक माना। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि जब मई 2019 में बिल्डिंग प्लान को मंजूरी दी गई थी, तो शैक्षणिक भवनों के लिए इमारत की ऊंचाई के आधार पर फायर एनओसी की आवश्यकता को नजरअंदाज कर दिया गया था। मास्टर प्लान 2021 द्वारा निर्धारित अग्नि सुरक्षा और सुरक्षा मानकों की इस जानबूझकर अनदेखी को उल्लंघन माना गया।
बेसमेंट के दुरुपयोग की अनदेखी
DM के रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कंप्लीशन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी करने के बाद एमसीडी के अधिकारी बिल्डिंग का निरीक्षण करने और बेसमेंट के दुरुपयोग को संबोधित करने में विफल रहे, जिसे सील किया जाना चाहिए था। डीएम इस बात से हैरान थे कि मुखर्जी नगर की घटना के बाद एमसीडी ने 4 अगस्त 2023 को राव आईएएस को कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन बेसमेंट के दुरुपयोग का उल्लेख नहीं किया। 8 अगस्त को नोटिस का जवाब मिलने के बाद भी बिल्डिंग डिपार्टमेंट ने बेसमेंट को सील करने के बजाय मामले ो फायर डिपार्टमेंट को भेज दिया, ताकि फायर डिपार्टमेंट बिल्डिंग का निरीक्षण कर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने पर विचार कर सके।
फायर डिपार्टमेंट को एनओसी जारी नहीं करनी चाहिए थी
DM का मानना था कि बेसमेंट को सील न करना, कारण बताओ नोटिस में इसके दुरुपयोग का उल्लेख न करना और वास्तविक स्थिति के बारे में डिप्टी कमिश्नर को गुमराह करना संबंधित जूनियर इंजीनियर द्वारा जानबूझकर की गई लापरवाही लगती है। अग्निशमन विभाग ने भी बेसमेंट के दुरुपयोग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और न ही मामले को एमसीडी को भेजा, जबकि 1 जुलाई 2024 को निरीक्षण के दौरान यह साफ तौर पर दिख रहा था। छात्र धीरज और दिनेश ने डीएम को बताया कि वे पिछले डेढ़ साल से बेसमेंट में लाइब्रेरी का इस्तेमाल कर रहे हैं। बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन को देखते हुए अग्निशमन विभाग को एनओसी जारी नहीं करनी चाहिए थी।

