बसों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों तथा पैदल यात्रियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार नए और कड़े कदम उठाने जा रही है। बुधवार को परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने बस चालकों के लिए नए दिशा-निर्देशों तथा सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त सावधानियों की घोषणा के साथ गाइडलाइन जारी की है। यह पहल हाल ही में हुई बस दुर्घटनाओं के मद्देनजर की गई है। 29 जुलाई को परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन उपायों को मंजूरी दी गई। गाइडलाइन में जारी नियम डीटीसी और क्लस्टर स्कीम बसों के सभी चालकों पर लागू होंगे, चाहे वे अनुबंधित हों या स्थायी कर्मचारी।
सरकार की नई गाइडलाइन
- चालकों के लिए दोहरी शिफ्ट नहीं लगेगी
सभी डीटीसी और डीआईएमटीएस चालकों को आधार-आधारित प्रणाल के आधार पर ड्यूटी सौंपी जाएगी। इस आधार-आधारित ड्यूटी आवंटन प्रणाली को लागू करने के लिए एक नया सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी चालक दोहरी शिफ्ट में काम न कर सके। सभी चालकों का एक एकीकृत डेटाबेस बनाया जा रहा है, जो सभी डिपो प्रबंधकों के लिए सुलभ होगा।
- चालक की पहचान के लिए चेहरे की पहचान
प्रत्येक डिपो में बायोमेट्रिक चेहरे की पहचान प्रणाली लगाई जाएगी। इसके लिए टेंडर नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है। यह सिस्टम फेसियल रिकग्निशन के जरिए ड्राइवर की पहचान को सत्यापित करेगा, ताकि दोहरी ड्यूटी को रोका जा सके। अगर इस सिस्टम के बावजूद कोई ड्राइवर डबल शिफ्ट में काम करता पाया जाता है, तो जिम्मेदार डिपो मैनेजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- सिमुलेटर से होगा प्रशिक्षण
डीटीसी और क्लस्टर बसों के कई ड्राइवर दूसरे राज्यों से आते हैं और उनके पास अपने-अपने राज्यों के भारी वाहन लाइसेंस होते हैं। पहले इन ड्राइवरों को डीटीसी नंद नगरी ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण मिलता था। आगे चलकर प्रशिक्षण और परीक्षण के लिए ड्राइविंग सिमुलेटर का इस्तेमाल किया जाएगा। इन सिमुलेटर पर ड्राइवरों का परीक्षण किया जाएगा और जो सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें खारिज कर दिया जाएगा।
- ब्लैकलिस्ट ड्राइवरों की होगी नियमित पहचान
वर्तमान में, एक डिपो या क्लस्टर में ब्लैकलिस्ट किए गए ड्राइवर दूसरे डिपो या क्लस्टर में रोजगार पा सकते हैं। इसे रोकने के लिए ड्राइवरों का एक कॉमन पूल बनाया जा रहा है। उल्लंघन या दुर्घटनाओं के लिए ब्लैकलिस्ट किए गए किसी भी ड्राइवर की तुरंत एक एकीकृत डेटाबेस के माध्यम से पहचान की जा सकेगी, जिससे उन्हें कहीं और रोजगार मिलने से रोका जा सकेगा।
- ब्रीथलाइजर से किया जाएगा परीक्षण
शराब पीकर गाड़ी चलाने पर लगाम लगाने के लिए सभी डिपो में ब्रीथलाइजर लगाए जाएंगे। डिपो प्रबंधकों को ड्यूटी सौंपने से पहले प्रत्येक ड्राइवर की सांस की जांच करानी होगी।
- सरकारी अस्पताल में मेडिकल जांच
नौकरी पर रखने से पहले ड्राइवरों की स्वास्थ्य जांच करानी होगी। 45 वर्ष की आयु के बाद ड्राइवरों को हर पांच साल में मेडिकल जांच करानी होगी। पहले ड्राइवर निजी डॉक्टरों से जांच करवा सकते थे, लेकिन अब सभी मेडिकल जांच केवल दिल्ली सरकार के अस्पतालों में ही की जाएंगी। इसके लिए छह अस्पतालों को नामित किया गया है। इसके अलावा, सभी ड्राइवरों को रिफ्रेशर कोर्स में भाग लेना होगा।

