Ghaziabad News: गाजियाबाद शहर कोतवाली पुलिस और सिटी जोन एसओजी टीम ने ऑन डिमांड बच्चों का अपहरण करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह की सरगना और उसके पति समेत पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक किशोरी भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने सोमवार शाम जिला अस्पताल के बाहर से चार माह के बच्चे का अपहरण किया था। बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया गया है।
महरौली गांव निवासी विक्की की पत्नी सृष्टि सोमवार को अपने चार माह के बच्चे निहाल को लेकर जिला अस्पताल आई थी। सृष्टि महरौली से एक नाबालिग महिला मित्र के साथ ऑटो रिक्शा में अस्पताल पहुंची थी। ऑटो रिक्शा में पहले से ही एक महिला बैठी हुई थी। अस्पताल के गेट पर चालक और चालक को जानने वाली महिला ने सृष्टि से बच्चे को उनके पास छोड़कर रजिस्ट्रेशन पर्ची लेने के लिए अंदर जाने को कहा। सृष्टि के मना करने पर उसकी नाबालिग सहेली ने भी बच्चे को सौंपने का सुझाव दिया।
पुलिस ने दी जानकारी
अनिच्छा से सृष्टि बच्चे को ऑटो चालक और महिला के पास छोड़कर पर्ची लेने चली गई। वापस लौटने पर उसने देखा कि ऑटो चालक और महिला बच्चे को लेकर गायब हो गए हैं। काफी खोजबीन के बाद सृष्टि ने अपने परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद परिजनों ने सिटी कोतवाली में अपहरण का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ऑटो चालक का पता लगाया।
डीसीपी सिटी राजेश कुमार ने बताया कि पुलिस बच्चे को बरामद करने के लिए पूरी तत्परता से काम कर रही है। सीसीटीवी फुटेज से ऑटो रिक्शा का नंबर लेकर पुलिस ने चालक का पता लगा लिया। शुरुआत में चालक ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ में उसने बच्चे को अपने रिश्तेदार के घर से बरामद किया। डीसीपी सिटी ने बताया कि ऑटो चालक लोकेश अरोड़ा, उसकी पत्नी कविता अरोड़ा, सुलेखा (मूल निवासी सहरसा, बिहार, वर्तमान में दौलतराम कॉलोनी, दादरी, गौतमबुद्ध नगर), महरौली गांव की फूलबाई और फूलबाई की 17 वर्षीय बेटी को गिरफ्तार कर गिरोह का पर्दाफाश किया गया।
निःसंतान दम्पतियों से बेचती थी बच्चे
डीसीपी सिटी के मुताबिक ऑटो चालक लोकेश की पत्नी कविता दादरी निवासी सुलेखा की सहेली है। दोनों पहले एक अस्पताल में काम कर चुकी हैं। सुलेखा निसंतान दंपत्तियों को निशाना बनाकर उनसे बच्चा दिलाने का सौदा करती थी। दिल्ली की एक महिला के कहने पर सुलेखा ने कविता से नवजात दिलाने को कहा। कविता े पति ने साथी ऑटो चालक लतीफ को इसकी जानकारी दी, जिसने अपनी प्रेमिका फूलबाई से संपर्क किया।
साढ़े तीन लाख में बेचा बच्चा
फूलबाई और सृष्टि एक ही किराये के मकान में रहती थीं। चार माह पहले सृष्टि ने बेटे को जन्म दिया था। फूलबाई ने लतीफ के साथ मिलकर इस बच्चे के अपहरण की योजना बनाई। लतीफ की परिचित सविता सृष्टि को ऑटो रिक्शा में अस्पताल लेकर गई। घटना के वक्त लोकेश ऑटो चला रहा था। घटना में शामिल लतीफ और सविता फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। बच्चे को साढ़े तीन लाख में बेचा गया। डीसीपी सिटी ने बताया कि कविता और उसके पति लोकेश ने बच्चे को साढ़े तीन लाख रुपये में सुलेखा को बेचने का सौदा किया था।
बच्चे को दिल्ली में सौंपा जाना था, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने बच्चे को बरामद कर लिया। डीसीपी ने बताया कि इसी गिरोह ने 9 मार्च को मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र से दो माह के बच्चे का अपहरण किया था। उस बच्चे को भी सुलेखा के जरिए दिल्ली में एक महिला को साढ़े तीन लाख रुपये में बेचा गया था। उस बच्चे को भी बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है।
सुलेखा और कविता ने अपनी कोख किराए पर दी हुई हैं।
डीसीपी ने खुलासा किया कि कविता और सुलेखा ने अपनी कोख तीन-तीन लाख रुपये में किराए पर दी हुई थीं। भुगतान डिलीवरी के बाद मिलता था, जिसमें काफी समय लग जाता था। इस देरी के चलते उन्होंने बच्चों का अपहरण कर उन्हें बेचना शुरू कर दिया। गिरोह ने और कितने बच्चों का अपहरण किया है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

