गाजियाबाद सदर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन टिकट की दावेदारी को लेकर होड़ तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी पार्टी के एक कार्यक्रम में वसुंधरा पहुंचे तो टिकट के दावेदार उनके इर्द-गिर्द मंडराते रहे। प्रदेश अध्यक्ष ने स्थानीय नेताओं और दावेदारों से चुनाव को लेकर राय-मशविरा भी किया, लेकिन जाने से पहले उन्होंने कहा कि लखनऊ आइए, वहीं चर्चा करेंगे।
ये चेहरे हैं टिकट के लाइन में
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री वीके सिंह की जगह सदर क्षेत्र से दो बार विधायक रहे अतुल गर्ग को टिकट दिया था। अतुल गर्ग की जीत के बाद इस विधानसभा सीट पर उपचुनाव की जरूरत है। भाजपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक स्थानीय स्तर पर टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। इनमें पार्टी के महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा भी शामिल हैं। बताया जाता है कि लोकसभा चुनाव के दौरान जब वीके सिंह को टिकट दिलाने के लिए पांच विधायकों समेत कई नेता एकजुट हुए थे। सिंह का टिकट कटने और संगठन के समर्थन के बाद तय हुआ कि अतुल गर्ग को टिकट मिला तो उपचुनाव में सदर सीट पर महानगर अध्यक्ष को टिकट दिलाने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
जातिय समीकरण पर टिकट का फैसला
अन्य दावेदार भी जातिगत आंकड़े पेश कर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। चूंकि साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा जैसे ब्राह्मणों को पहले ही कैबिनेट में जगह मिल चुकी है, ऐसे में दूसरी जाति का प्रत्याशी होना फायदेमंद हो सकता है। बताया जाता है कि रविवार को जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी वसुंधरा से मिलने पहुंचे तो महानगर अध्यक्ष मौजूद नहीं थे। हालांकि कई विधायकों और पार्टी नेताओं ने संजीव शर्मा के टिकट की पैरवी की। जवाब में प्रदेश अध्यक्ष ने सिर्फ मुस्कुराते हुए कहा कि अगर किसी को कोई दिक्कत या चिंता है तो वह लखनऊ आ जाए।
कांग्रेस-सपा गठबंधन की स्थिति भी अभी स्पष्ट नहीं
उपचुनाव के लिए कांग्रेस-सपा गठबंधन की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। मीडिया रिपोर्ट कि माने तो अगर गठबंधन होता है तो यह सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है। इसलिए कई दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें पूर्व सांसद सुरेंद्र प्रकाश गोयल के बेटे सुजीत गोयल और लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रहीं डॉली शर्मा शामिल हैं। सपा नेता भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। इसी तरह बसपा भी उपचुनाव की अंदरूनी तैयारी में जुटी है, लेकिन पार्टी नेता अभी खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं।

