दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर से पीड़ित मरीजों को नकली कैंसर की दवा बेचने वाले 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह रैकेट कमजोर मरीजों को निशाना बनाता था। उन्हें कैंसर उपचार के बदले नकली दवाएं बेचता था और उनसे बहुत ज्यादा कीमत वसूलता था। जांच में पता चला कि ये अपराधी अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली असली कीमोथेरेपी दवाओं की खाली शीशियों में एंटी-फंगल दवा भरकर उन्हें फिर से बेच रहे थे।
अलग-अलग ब्रांड की नकली कैंसर की दवाएं बरामद
मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विकल जैन, सूरज शाट, नीरज चौहान, परवेज, कोमल तिवारी, अभिनय कोहली और तुषार चौहान समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से नीरज गुरुग्राम का रहने वाला था, जबकि बाकी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में रहते थे। पुलिस ने इन आरोपियों से कुल 9 अलग-अलग ब्रांड की नकली कैंसर की दवाएं बरामद कीं, जिनमें 7 अंतरराष्ट्रीय ब्रांड और 2 भारतीय ब्रांड शामिल हैं। यह गिरोह मुख्य रूप से हरियाणा, बिहार, नेपाल और अफ्रीकी देशों से इलाज के लिए दिल्ली आने वाले मरीजों को निशाना बनाता था। वे मोती नगर के डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स, गुरुग्राम के साउथ सिटी, दिल्ली के यमुना विहार समेत कई जगहों से काम करते थे और अपने काम में अस्पताल के कर्मचारियों को शामिल करते थे।
बरामद नकली दवाओं की कीमत करीब ₹1.75 करोड़
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 140 भरी हुई शीशियाँ, पैकेजिंग सामग्री, नकदी, विदेशी मुद्रा, सीलिंग मशीन और खाली शीशियाँ जब्त कीं। जब्त की गई नकली दवाओं की कीमत ₹1.75 करोड़ आंकी गई है। गिरोह के सरगना विकल जैन को मोती नगर से गिरफ्तार किया गया, जहाँ वह नकली दवाएँ बनाता था। गिरोह का संचालन बहुत ही जटिल था, जिसमें संदेह से बचने के लिए सावधानीपूर्वक पैकेजिंग की जाती थी। गुरुग्राम के साउथ सिटी में नीरज चौहान को 137 भरी हुई शीशियों के साथ पकड़ा गया, जिन पर कीट्रूडा, इनफिनजी, टेसेंट्रिक, पेरजेटा, ओपडाटा, डारज़लेक्स और एर्बिटक्स के नाम थे।
अस्पताल के मिलीभगत से हो रहा था ठगी
इसके अलावा, पुलिस ने उसके पास से 519 खाली शीशियाँ और 864 खाली पैकेजिंग बॉक्स बरामद किए। उसके सहयोगी तुषार चौहान, जो आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा था, को भी गिरफ्तार किया गया। यमुना विहार में एक अन्य संदिग्ध प्रवेज को 20 खाली शीशियों के साथ पकड़ा गया। आगे की जांच में कोमल तिवारी और अभिनय कोहली की गिरफ़्तारी हुई, जो नकली दवाओं के वितरण में शामिल थे। वे दिल्ली के एक प्रमुख कैंसर अस्पताल की साइटोटॉक्सिक मिश्रण इकाई के भीतर काम करते थे, और प्रति खाली शीशी 5,000 रुपये तक चार्ज करते थे। इस संगठित अपराध नेटवर्क पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और इस तरह के जघन्य अपराधों के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने की उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

