अब जब लोकसभा चुनाव खत्म हो चुकी हैं, इसके नतीजों को लेकर उत्तर प्रदेश में भाजपा के भीतर अंदरूनी कलह की खबरें सामने आ रही हैं। महज 33 सीटों पर सफलता पाने वाली बीजेपी में दिल्ली से लेकर लखनऊ तक पार्टी नेताओं के बीच बैठकों का दौर चल रहा है।
पार्टी के प्रदर्शन पर 15 पन्नों की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में भाजपा नेतृत्व ने 2024 के चुनाव के नतीजों पर पार्टी की आंतरिक रिपोर्ट पर चर्चा की है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने लोकसभा चुनाव में राज्य की 80 सीटों पर पार्टी के प्रदर्शन पर 40,000 पार्टी कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक के आधार पर 15 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है। पिछले दो दिनों में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर उन्हें रिपोर्ट सौंपी है। जिसे लेकर नेतृत्व से विस्तृत चर्चा भी हुई है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा की हार के बड़े कारण
- पार्टी के वोट शेयर में 8% की कमी।
- राज्य के सभी 6 क्षेत्रों पश्चिमी यूपी, ब्रज, कानपुर-बुंदेलखंड, अवध, गोरखपुर और काशी में वोट शेयर में गिरावट
- पश्चिमी और काशी क्षेत्रों में खराब प्रदर्शन।
- सरकार के प्रति पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष, अधिकारियों द्वारा मनमानी कार्रवाई और पिछले 6 वर्षों में सरकारी नौकरियों में पेपर लीक
- निचले स्तर के चुनाव अधिकारियों द्वारा मतदाता सूचियों से मुख्य मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप।
- संविदा कर्मियों की भर्ती में सामान्य वर्ग के लोगों को प्राथमिकता के कारण विपक्ष की मजबूती
- पार्टी के को लेकर राजपूत समाज की नाराजगी
- पार्टी नेताओं द्वारा दिए गए बयान
- टिकट वितरण को लेकर जल्दबाजी और कार्यकर्ताओं की नाराजगी
इन कारणों के साथ साथ 15 पन्नों की रिपोर्ट में कुर्मी, कोइरी, मौर्य, शाक्य और लोध समुदायों जैसे गैर-यादव ओबीसी के वोट प्रतिशत में भी कमी का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, बसपा के 2019 की तुलना में मुख्य वोट शेयर में 10% की गिरावट का फायदा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को हुआ।
रिपोर्ट पर पार्टी नेतृत्व दिल्ली में करेगी चर्चा
भाजपा का मानना है कि इन मुद्दों का त्वरित समाधान, सरकारी अधिकारियों और प्रशासन के साथ संबंधों में सुधार और पार्टी कार्यकर्ताओं का विश्वास बहाल करना आगामी उपचुनावों या राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों में फायदेमंद साबित हो सकता है। इस रिपोर्ट पर चर्चा के लिए जल्द ही दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे।

