मीडिया सूत्रों की माने तो उत्तर प्रदेश विधानसभा का Monsoon Session 29 या 30 जुलाई से शुरू होगा। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना के बीच हुई बैठक के बाद मानसून सत्र बुलाने पर सहमति बन गई। इस बैठक में 29 या 30 जुलाई से मानसून सत्र बुलाने को लेकर भी चर्चा हुई।
आगामी कैबिनेट बैठक में Monsoon Session बुलाने का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री योगी और सुरेश खन्ना ने मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। सूत्र बताते हैं कि विधानसभा का Monsoon Session बुलाने को लेकर तीनों के बीच चर्चा हुई। योगी सरकार की आगामी कैबिनेट बैठक में विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्यपाल विधानसभा सत्र बुलाने को मंजूरी देंगे।
विधानसभा का यह सत्र लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पहला सत्र होगा। लोकसभा चुनाव में जीत के साथ ही समाजवादी पार्टी के विधायकों में जोश और उत्साह में है। नतीजतन, सपा कानून-व्यवस्था, संविधान, बेरोजगारी समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरेगी। मानसून सत्र चार से पांच दिन तक चल सकता है।
Monsoon Session में इन मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद
प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस मुठभेड़ में हत्या की रिपोर्ट भी विधानसभा के मानसून सत्र में पेश की जा सकती है। साथ ही उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) (संशोधन) विधेयक, 2024 को कानून के रूप में पेश किया जाएगा। इसके बाद लीक पेपर मामले में आरोपियों को दो साल से लेकर आजीवन कारावास और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा।
विधानसभा में कौन होगा नेता प्रतिपक्ष
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव कन्नौज से सांसद हैं। इसलिए Monsoon Session से पहले सपा को नया नेता प्रतिपक्ष चुनना होगा। सपा के मौजूदा विधायकों में शिवपाल यादव, राजभर समाज से राम अचल राजभर, दलित समाज से इंद्रजीत सरोज और ओम प्रकाश सिंह प्रबल दावेदार हैं। सपा नेतृत्व ऐसा नेता प्रतिपक्ष बनाने पर मंथन कर रहा है जो सदन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना को टक्कर दे सके। सरकार के दबाव में आए बिना आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सदन में सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरा जा सकता है। गौरतलब है कि विधानसभा में विपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। इसलिए आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सपा सोच-समझकर सदन में अपना चेहरा तय करेगी।

