सेक्टर-30 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (PGICH) के डॉक्टरों ने दो महीने के बच्चे में नियोनेटल इचथियोसिस-स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस (NISCH) सिंड्रोम नामक दुर्लभ बीमारी की पहचान कर उसका इलाज शुरू की है। बीमारी की समय पर पहचान होने से इसका इलाज आसान हो जाएगा। मेडिकल जेनेटिक्स विभाग के डॉ. मयंक निलय ने जांच के दौरान संदेह होने पर मुजफ्फरनगर के परिवार को आगे की सलाह के लिए चाइल्ड पीजी इंस्टीट्यूट जाने की सलाह दी जिसके बाद बीमारी की पहचान हुई है।
आनुवांशिक जांच के बाद NISCH की पहचान
ज्ञात हो कि बच्चे की आनुवंशिकी की जांच की गई। जांच में पता चला कि बच्चे को नियोनेटल इचथियोसिस-स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस ( NISCH) सिंड्रोम है, जो एक दुर्लभ बीमारी है जो 10 लाख बच्चों में से एक को होती है। अब तक ज्यादातर मामले उत्तरी अफ्रीका के उत्तरी मोरक्को में पाए गए हैं। भारत में दर्ज यह पहला मामला है। नियोनेटल इचथियोसिस-स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है जो त्वचा और लीवर दोनों को प्रभावित करता है। इचथियोसिस एक त्वचा की स्थिति है जो सूखी, मोटी और पपड़ीदार त्वचा का कारण बनती है। जबकि स्केलेरोसिंग कोलांगाइटिस एक यकृत की स्थिति है जहाँ पित्त नलिकाएँ सूजन और निशान बन जाती हैं, जिससे यकृत के कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है। इस स्थिति का सही निदान और उपचार काफी जटिल है।
ये हैं बीमारी के मुख्य कारण
NISCH के मुख्य कारणों में CLEDEN 1 जीन शामिल है। CLEDEN 1 जीन त्वचा और यकृत के कामकाज में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस जीन में उत्परिवर्तन नियोनेटल इचथियोसिस-स्केलेरोसिंग कोलांगाइटिस जैसी स्थितियों से जुड़ा हो सकता है, जो यकृत में त्वचा की बाधा और पित्त नलिकाओं को प्रभावित करता है। CLEDEN 1 जीन में उत्परिवर्तन त्वचा और यकृत दोनों में समस्याएँ पैदा कर सकता है, जिसमें सूखापन, त्वचा का मोटा होना और यकृत में सूजन शामिल है।

