Aaj Ka Panchang: हिंदू पंचांग के अनुसार 27 जून 2024 को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस दिन शतभिषा नक्षत्र और आयुष्मान योग की उपस्थिति रहेगी। चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेगा। आइए जानते हैं आज का पंचांग..
दिन के लिए शुभ समय
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक
- राहु काल: दोपहर 2:08 बजे से दोपहर 3:52 बजे तक
पंचांग विवरण:
- तिथि: षष्ठी शाम 6:39 बजे तक
- नक्षत्र: शतभिषा सुबह 11:36 बजे तक
- पहला करण: गारा सुबह 7:47 बजे तक
- दूसरा करण: वणिज शाम 6:39 बजे तक
- पक्ष: कृष्ण
- सप्ताह का दिन: गुरुवार
- योग: आयुष्मान सुबह 12:27 बजे तक (अगले दिन)
- सूर्योदय: सुबह 5:27 बजे तक
- सूर्यास्त: शाम 7:21 बजे तक
- चंद्रमा राशि: कुंभ
- विक्रम संवत: 2081
- शक संवत: 1944
- माह: आषाढ़
पंचांग को समझना
हिंदू पंचांग, जिसे वैदिक कैलेंडर के रूप में भी जाना जाता है, एक पारंपरिक उपकरण है जिसका उपयोग सटीक समय-निर्धारण और विभिन्न गतिविधियों के लिए शुभ समय की गणना के लिए किया जाता है। इसमें पाँच प्रमुख तत्व शामिल हैं: तिथि , नक्षत्र, वार, योग, और करण।
पंचांग घटकों का विस्तृत विवरण:
1. तिथि:
हिंदू समय-निर्धारण में, तिथि सूर्य के सापेक्ष चंद्र रेखांश को 12 डिग्री तक बढ़ने में लगने वाले समय को दर्शाती है। प्रत्येक चंद्र माह में 30 तिथियाँ होती हैं, जिन्हें शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में विभाजित किया जाता है। शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा है, और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या (नया चंद्रमा) है।
2. नक्षत्र:
नक्षत्र 27 चंद्र भवन या नक्षत्र हैं, जिनसे होकर चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा में यात्रा करता है। प्रत्येक नक्षत्र का अपना महत्व और शासक देवता होता है। 27 नक्षत्र हैं: अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूला, पूर्वा आषाढ़, उत्तरा आषाढ़, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती।
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3. वार:
सप्ताह के सात दिनों का नाम प्राचीन ज्योतिष के सात खगोलीय पिंडों के नाम पर रखा गया है: सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार , शनिवार, और रविवार।
4. योग:
योग पंचांग में एक समय अवधि है जो सूर्य और चंद्रमा के देशांतरों को जोड़ती है। 27 योग हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी अलग-अलग विशेषताएं हैं: विष्कुंभ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगंड, सुकर्मा, धृति, शूल, गंड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतिपात, वरियान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्मा, इंद्र और वैधृति।
5. करण:
करण तिथि का आधा भाग होता है, जिससे कुल 11 करण बनते हैं: बव, बलव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पद, नाग और किम्स्तुघ्न। विष्टि करण को भद्रा के नाम से भी जाना जाता है और इसे नए उद्यम शुरू करने के लिए अशुभ माना जाता है।

