हाउस और सीवरेज कर लगने से वेवसिटी और सैंससिटी के निवासियों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। इस मुद्दे को लेकर मेयर सुनीता दयाल ने शासन को पत्र लिखा था। इसके चलते सोमवार को इस मामले को सुलझाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई। बताया जा रहा है कि जीडीएए, हाईटेक टाउनशिप के प्रतिनिधियों के अलावा नगर निगम भी अपनी बात रखेगा। अगर फैसला निगम के पक्ष में होता है तो यहां के निवासियों को इंदिरापुरम की तरह हाउस टैक्स देना होगा, वहीं बिल्डर को भी मेंटेनेंस फीस देनी होगी, क्योंकि जब तक कॉलोनी हैंडओवर नहीं हो जाती, तब तक निगम यहां का काम नहीं देखेगा।
15 दिन के भीतर रिपोर्ट कमेटी के समक्ष रखी जाएगी
जीडीएए वीसी अतुल वत्स का कहना है कि हाईटेक टाउनशिप से निगम द्वारा वसूले जा रहे टैक्स के मुद्दे पर चर्चा के लिए सोमवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई। मालूम हो कि शासन की हाईपावर कमेटी ने 6 सदस्यीय कमेटी बनाई है। समिति ने नगर एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव को अध्यक्ष बनाया है, जबकि नगर विकास विभाग, प्रशासन एवं औद्योगिक विकास विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा नामित वरिष्ठ अधिकारी, जीडीएए एवं एलडीए के उपाध्यक्षों के साथ ही लखनऊ एवं गाजियाबाद के नगर आयुक्तों को समिति में शामिल किया गया है। निर्देश दिया गया है कि इस मामले में 15 दिन के भीतर रिपोर्ट तैयार कर हाई पावर कमेटी के समक्ष रखी जाएगी।
निगम को यहां से कर वसूली का अधिकार मिलना चाहिए : निगम
निगम का तर्क है कि अधिनियम के तहत किसी भी कॉलोनी के निर्माण के सात वर्ष बाद निगम को कर वसूली का अधिकार प्राप्त होता है। हाईटेक टाउनशिप ने यह अवधि पार कर ली है। इसलिए निगम को यहां से कर वसूली का अधिकार मिलना चाहिए। हाईटेक टाउनशिप का तर्क है कि शासन का स्पष्ट आदेश है कि जब तक टाउनशिप हैंडओवर नहीं हो जाती, तब तक निगम द्वारा कर वसूली नहीं की जाएगी। हालांकि, निगम इस तर्क को खारिज करते हुए कहता है कि अधिनियम किसी भी शासनादेश का स्थान नहीं लेता, इसलिए अधिनियम में जो उल्लेख है, वही लागू होना चाहिए।
कर न वसूले जाने के मुद्दे को लेकर कमेटी गठित
जब हाईटेक टाउनशिप की नीति बनी थी, तब यह तय हुआ था कि जब तक टाउनशिप नगर निगम को नहीं सौंप दी जाती, तब तक निगम द्वारा कोई टैक्स नहीं वसूला जाएगा। लेकिन मेयर सुनीता दयाल ने शासन को पत्र लिखकर कहा कि 1997 में शासनादेश के अनुसार यदि कोई योजना है और वह सात साल तक नगर निगम को नहीं सौंपी जाती है, तो निगम को वहां टैक्स वसूलने का अधिकार है। हाईटेक टाउनशिप योजना में भी इस शासनादेश को लागू करने की मांग की गई है। मेयर के पत्र के बाद शासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया। इसलिए हाईटेक टाउनशिप में टैक्स न वसूले जाने के मुद्दे को सुलझाने या संशोधन करने के लिए कमेटी गठित की गई है।
फिलहाल 2 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से शुल्क
बताया जाता है कि इसका असर वेव सिटी और सैंस सिटी टाउनशिप के 8 से 10 हजार परिवारों पर पड़ेगा। आने वाले दिनों में इनकी संख्या में तेजी से इजाफा होने की उम्मीद है। डीएम सर्किल रेट के हिसाब से इन सभी परिवारों को हाउस टैक्स देना होगा। अभी बिल्डर ग्रुप हाउसिंग के लिए 2 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से शुल्क लेता है और 10 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से मेंटेनेंस चार्ज वसूलता है। 10 रुपये प्रति वर्ग गज जमीन। यहां की जनता को तब परेशानी होगी जब एक तरफ निगम हाउस टैक्स लगाता है और दूसरी तरफ बिल्डर ग्रुप हाउसिंग में मेंटेनेंस चार्ज वसूलता है।

