नोएडा में निर्माणाधीन जेवर एयरपोर्ट का संचालन शुरू होने से पहले एयरपोर्ट परिसर के बाहर 10 हेक्टेयर भूमि पर वन्यजीवों के लिए पुनर्वास केंद्र स्थापित करना जरूरी था। इस पर 5 करोड़ रुपये खर्च होने थे। स्थिति यह है कि यमुना प्राधिकरण द्वारा वन विभाग को 2023 में धनराशि जारी कर दी गई, लेकिन इस केंद्र का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। यह काम कब शुरू होगा, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है।
वन्यजीव पुनर्वास केंद्र की स्थापना में हो रही है देरी
एयरपोर्ट का संचालन शुरू होने से कई महीने पहले इस केंद्र का संचालन महत्वपूर्ण था। बताया जाता है कि लुप्तप्राय प्रजातियों सहित वन्यजीव अक्सर एयरपोर्ट के निर्माण स्थल के आसपास घूमते नजर आते हैं, क्योंकि उनके पास रुकने के लिए और कोई जगह नहीं होती। इससे रनवे पर विमानों की लैंडिंग के दौरान भी समस्या हो सकती है। वन्यजीव अक्सर रनवे की परिधि के आसपास खुलेआम घूमते रहते हैं। वन्यजीव पुनर्वास केंद्र की स्थापना में देरी के कारण एयरपोर्ट संचालन के लिए पर्यावरण मानदंडों का पालन नहीं हो पा रहा है, जिससे संचालन शुरू होने में और देरी हो सकती है। एयरपोर्ट को समय पर शुरू करने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही काफी गंभीर हैं। ऐसे कई कार्य हैं, जिनकी देरी के कारण वे निर्धारित समय सीमा पर शुरू नहीं हो पाएंगे।
जेवर एयरपोर्ट के रनवे से जनावरों को हटाने काम अटका
वन विभाग ने वन्यजीव पुनर्वास केंद्र की स्थापना के लिए कुल अनुमानित लागत 5.39 करोड़ रुपये में से 4.5 करोड़ रुपये पहले ही जारी कर दिए हैं। 10 हेक्टेयर भूमि काफी समय पहले आवंटित की गई थी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है, लेकिन टेंडर जारी होने और काम शुरू होने से पहले कई स्तरों पर मंजूरी का इंतजार है। एयरपोर्ट का निर्माण शुरू होने से पहले देहरादून वन्यजीव संस्थान ने एक अध्ययन कराया था। इसमें बताया गया था कि एयरपोर्ट क्षेत्र के 10 किलोमीटर के दायरे में बड़ी संख्या में सारस क्रेन और काले हिरण मौजूद हैं। इनके संरक्षण के लिए पुनर्वास केंद्र की स्थापना जरूरी है। एयरपोर्ट के निर्माण और आसपास के क्षेत्रों में विकास से इनका पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ेगा, ऐसे में इस केंद्र की स्थापना जरूरी है।
सभी तरह की सुविधाओं से सम्पन्न होगी वन्यजीव पुनर्वास केंद्र
एयरपोर्ट का निर्माण कर रही कंपनी ने भी सरकार को पत्र के माध्यम से बताया था कि साइट पर रोज जानवर आते हैं, जिससे कर्मचारी काम छोड़कर चले जाते हैं। देहरादून संस्थान से मिली रिपोर्ट के अनुसार सर्वे में 21 स्थानों पर 176 सारस क्रेन पाए गए। यहां 258 काले हिरण और कई अन्य प्रकार के वन्यजीव थे, जो विकास के कारण बेघर हो गए हैं। पुनर्वास केंद्र में ये सुविधाएं मिलेंगी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस केंद्र में पशु चिकित्सक, पशु शल्य चिकित्सक और कई अन्य विशेषज्ञ होंगे। घायल पशुओं के उपचार के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा। चलने में असमर्थ दिव्यांग पशुओं को विशेष निगरानी में रखा जाएगा। यहां मृत पशुओं के पोस्टमार्टम और दाह संस्कार की भी व्यवस्था की जाएगी। अभी तक इस प्रकार के पशुओं को जमीन में दफनाया जाता रहा है।

