लोकसभा चुनाव में 37 सीटों पर जीत से उत्साहित समाजवादी पार्टी और उम्मीदों के मुताबिक कम सीटों पर जीत के बाद आत्ममंथन में जुटी भाजपा जल्द ही एक और बड़ी परीक्षा से दो-चार होने वाली है। राज्य की विधानसभा सीटों पर होने वाले By-election में बीजेपी के लिए सरकार से लेकर संगठन तक और लोकसभा में जीत से उत्साहित सपा सभी की एक बार फिर परीक्षा होगी।
प्रदेश में 9 सीटों पर By-election
राज्यसभा चुनाव में सपा के कुछ विधायकों नें खेमा बदल लिया, जिसके बाद समाजवादी पार्टी अगर अपने छह बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त कराने में सफल हो जाती है तो राज्य में 16 सीटों पर ये By-election होंगे। ज्ञात हो कि इन 16 , सीटों में 11 सीटें अभी सपा के पास हैं। भाजपा के पांच विधायक अब सांसद बन चुकें हैं तो अखिलेश यादव समेत सपा के चार विधायक भी सांसद चुने जा चुके हैं। फिलहाल राज्य में 9 इन्हीं 9 सीटों पर चुनाव होने हैं।
लोकसभा चुनाव के बाद नौ विधायक अब सांसद हैं
लोकसभा चुनाव में एनडीए और इंडीया गठबंधन से कुल 14 विधायक मैदान में थे। जिसमें नौ विधायक अब सांसद बन चुके हैं। भाजपा और एनडीए के विजयी में अलीगढ़ से अनूप प्रधान वाल्मीकि, गाजियाबाद से अतुल गर्ग, फूलपुर से प्रवीण पटेल और मझवां से विनोद बिंद के साथ ही बिजनौर से रालोद के विधायक चंदन चौहान सांसद बन चुके हैं। तो वहीं करहल से सपा प्रमुख अखिलेश यादव, मुरादाबाद से जिया उर रहमान बर्क, मिल्कीपुर से अवधेश प्रसाद और कटेहरी से लालजी वर्मा भी लोकसभा पहुंच चुके हैं।
इन 6 विधायकों की सदस्यता पर खतरा
इसके अलावा सपा अपने जिन छह बागी विधायकों की सदस्यता खत्म करना चाहती है। उन में मनोज पांडेय, राकेश पांडेय, अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह, विनोद चतुर्वेदी और पूजा पाल शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत कर भाजपा की मदद की थी, लेकिन इनमें से कोई भी लोकसभा चुनाव में सफल नहीं हो सका। फिलहाल इन विधायकों की राजनीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अखिलेश यादव जो कह रहे हैं, उसके मुताबिक अगर कार्रवाई मान लें तो अगले छह महीने के अंदर इन सीटों पर By-election भी हो जाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि अगर भाजपा इन विधायकों को इन सीटों पर उम्मीदवार बनाती है तो इनमें से कौन अपनी सीट बचाने में सफल होगा।

