उत्तर प्रदेश की गोंडा सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करने वाले कीर्ति वर्धन सिंह को मोदी सरकार 3.0 में शामिल किया गया है। एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल में राज्य मंत्री बनाए गए कीर्ति वर्धन ने 1998 में समाजवादी पार्टी से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने पिता का बदला लेते हुए बीजेपी उम्मीदवार बृजभूषण शरण सिंह को चुनाव हराया और पहली बार संसद पहुंचे।
बृजभूषण शरण सिंह को हराया था
कीर्ति वर्धन सिंह को प्रधानमंत्री मोदी का करीबी माना जाता है। कीर्ति वर्धन के पिता आनंद सिंह भी गोंडा से चार बार सांसद चुने गए थे। उन्होंने पहली बार 1971 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। उसके बाद 1980, 1984 और 1989 के चुनावों में भी आनंद सिंह जीते। हालांकि 1991 में आनंद सिंह बीजेपी के बृजभूषण शरण सिंह से चुनाव हार गए थे। इसके बाद 1996 में उन्होंने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक बार फिर उन्हें असफलता मिली और वह बृजभूषण शरण सिंह की पत्नी केतकी देवी सिंह से हार गईं।
तोड़ा पिता का रिकॉर्ड
लगातार दो चुनाव हारने के बाद आनंद सिंह ने अपनी राजनीतिक विरासत अपने बेटे कीर्ति वर्धन सिंह को सौंप दी। कीर्ति वर्धन ने 1998 में पहली बार सपा के टिकट पर लड़ा और पिता की हार का बदला लेते हुए भाजपा प्रत्याशी बृजभूषण शरण को हराया। हालांकि 1999 में बृजभूषण ने यहां से जीत दर्ज की। इसके बाद 2004 में भी कीर्ति वर्धन सांसद चुने गए। 2009 में कांग्रेस के टिकट पर बेनी प्रसाद वर्मा ने गोंडा से चुनाव जीता। यह चुनाव हारने के बाद कीर्ति वर्धन सिंह 2014 में भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा के टिकट पर यहां से जीते।
सबसे ज्यादा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड
कीर्ति वर्धन सिंह लगातार तीन बार जीत चुके हैं। गोंडा लोकसभा सीट पर अब तक कुल 17 चुनाव हुए हैं। इस सीट से सबसे ज्यादा बार चुने जाने का रिकॉर्ड पहले कीर्तिवर्धन सिंह के नाम था, लेकिन अब यह रिकॉर्ड उनके बेटे कीर्तिवर्धन सिंह ने तोड़ दिया है। कीर्तिवर्धन सिंह इस सीट से पांचवीं बार सांसद चुने गए हैं। वहीं, बृजभूषण शरण सिंह दो बार इस सीट से जीत चुके हैं, जबकि एक बार उनकी पत्नी केतकी देवी सिंह सांसद चुनी गई हैं।

