Supreme Court में एक याचिका दायर कर अंतिम चरण के मतदान के तुरंत बाद एग्जिट पोल प्रकाशित करने वाले मीडिया घरानों और उनके सहयोगियों के खिलाफ जांच की मांग की गई है। इन मीडिया घरानों पर 4 जून को वास्तविक मतदान परिणाम के दिन शेयर बाजार पर कथित प्रभाव डालने का आरोप है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अतिरंजित एग्जिट पोल के कारण परिणाम के दिन शेयर बाजार में गिरावट के बाद खुदरा निवेशकों को 31 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
आम निवेशकों को 31 लाख करोड़ रुपये का नुकसान
याचिका में कहा गया है कि मीडिया घरानों ने 1 जून को चुनाव के अंतिम चरण के समाप्त होने के तुरंत बाद एग्जिट पोल पर चर्चा शुरू कर दी। उन्होंने 3 जून को शेयर बाजार खुलने तक आम निवेशकों को शेयर बाजार में निवेश करने के लिए राजी करने का प्रयास किया। इससे शेयर बाजार में अप्रत्याशित उछाल आया। याचिकाकर्ता ने कहा कि एग्जिट पोल जैसे परिणाम की उम्मीद में शेयर बाजार में तेजी आई, लेकिन जब पूर्वानुमान वास्तविकता में नहीं बदले तो बाजार में भारी गिरावट आई। अधिवक्ता बीएल जैन ने कहा कि 4 जून को मतगणना हुई और शेयर बाजार में भारी गिरावट आई, जिससे आम निवेशकों को 31 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ।
भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास
Supreme Court में अधिवक्ता वरुण ठाकुर के माध्यम से दायर याचिका में दावा किया गया है कि बाजार में भारी गिरावट के कारण 31 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिससे समग्र भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी और वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचेगा। याचिका में कहा गया है, किसी भी समाचार/बहस/कार्यक्रम के प्रसारण से किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में पक्षपात या पूर्वाग्रह की भावना नहीं आनी चाहिए। दुर्भाग्य से अनियंत्रित और अनियमित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एक वाणिज्यिक उद्योग के रूप में काम कर रहा है और एक राजनीतिक दल को दूसरे राजनीतिक दल के खिलाफ खड़ा करता है।
बड़े मीडिया घरानों और एजेंसियों के खिलाफ जांच की मांग
याचिका में एक्सिस माई इंडिया, इंडिया टुडे मीडिया प्लेक्स, टाइम्स नाउ, इंडिपेंडेंट न्यूज सर्विस प्राइवेट लिमिटेड (इंडिया टीवी), एबीपी न्यूज प्राइवेट लिमिटेड, रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क, न्यूज नेशनल नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड, टीवी9 भारतवर्ष और एनडीटीवी के खिलाफ सीबीआई, ईडी, सीबीडीटी, सेबी और एसएफआईओ से जांच की मांग की गई है। उन्होंने दावा किया कि एग्जिट पोल जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 ए और भारत के चुनाव आयोग द्वारा जारी 2 अप्रैल, 2024 के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

