लोकसभा चुनाव के नतीजें आ चुकें हैं। एनडीए लगातार तीसरी बार सत्ता में आई जिसे जनता का जनादेश मिला है। लेकिन बीजेपी अपने दम पर 272 का आंकड़ा नहीं छु सकी। पार्टी के इस प्रदर्शन का परिणाम उत्तरप्रदेश का नतीजा है। जहां पार्टी को महज 33 सीटों पर सफलता मिली। पिछले चुनाव परिणाम के अनुसार इस बार पार्टी को प्रदेश में 29 सीटों का नुकसान हुआ हैं। वोट शेयर की बात करें तो इस इस बार सीटों के साथ साथ BJP को यहाँ भी झटका लगा हैं।आम चुनाव 2014 में पार्टी को 42.63 % वोट और 2019 के चुनाव में 49.98 % वोट मिला था लेकिन इस बार यह आंकड़ा घटकर 41.37 % पर आ गया।
प्रदेश के 80 सीटों का नतीजा
- सपा – 37
- BJP – 33
- कांग्रेस – 6
- आरएलडी – 2
- आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) -1
- अपना दल (सोनेलाल) – 1
राम मंदिर मुद्दा का फायदा नहीं मिलना
प्रदेश में हार का एक बड़ा कारण रहा राम मंदिर मुद्दा का फायदा नहीं मिलना। लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद देश भर में BJP ने राम मंदिर निर्माण को चुनावी मुद्दा बनाया। लेकिन प्रदेश में ही यह मुद्दा काम नहीं आया। नतीजा यह रहा कि पार्टी अयोध्या सीट भी हार गई।
आंतरिक भीतरघात का परिणाम
प्रदेश में बीजेपी के हार को लेकर कहा जा रहा स्थानीय नेताओं की भीतरघात के कारण पार्टी प्रदेश में बेहतरीन प्रदर्शन नहीं कर सकी। कहा जा रहा ही की स्थानीय स्तर पर पार्टी प्रत्याशी का विरोध था। कई सीटों पर प्रचार के लिए भी स्थानीय नेता नहीं निकल रहें थे।
जातियों का चला जोर
BJP के प्रदेश में हार के पीछे जातीय समीकरण का बड़ा जोर देखने को मिला। इस बार पिछड़ी का वोट INDIA गठबंधन के खेमे में गोलबंद होने नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ा। इससे पहले टिकट बँटबारे को लेकर भी प्रदेश में बीजेपी से नाराजगी थी जिसे मैनेज करने के लिए प्रदेश में पूर्व, पश्चिम और मध्य यूपी क्षेत्रों में ब्राह्मणों, ठाकुरों, भूमिहारों, बनियों और ओबीसी के लोगों को मैनेज करने का प्रयास किया गया था। लेकिन आंतरिक भीतरघात के कारण पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा।

