नई दिल्ली। पिछले दिनों Bengaluru cafe Blast में मामले में नया खुलाशा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो मामले में पुलिस मिले सुराखों के अनुसार आरोपियों ने अपनी पहचान छुपाने के लिए नकली सिम, नकली आधार कार्ड , नकली ड्राइविंग लाइसेंस, आदि का उपयोग किया था। इसके अलावा डिजिटल फुट प्रिन्ट से बचने के लिए कैश में लेन देन किया गया।
दोनों आरोपियों को ट्रांजिट वारंट पर बेंगलुरु लाया गया
गौरतलब है कि बेंगलुरु कैफे विस्फोट मामले की जांच कर रही जांच एजेंसी ने 35 नकली सिम कार्डों के अलावा आधार कार्ड और महाराष्ट्र से कर्नाटक से तमिलनाडु तक के पते वाले ड्राइविंग लाइसेंस जैसे फर्जी पहचान दस्तावेजों की जानकारी एजेंसी को मिली है, जिसने बेंगलुरु कैफे विस्फोट के आरोपियों की मदद की। ज्ञात हो कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शुक्रवार को मुसाविर हुसैन शाजिब (30) को गिरफ्तार किया, जिसने कथित तौर पर बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में आईईडी लगाया और अदबुल मथीन ताहा (30), जिसने हमले और उसके बाद भागने की साजिश रची। दोनों को कोलकाता से 180 किलोमीटर दूर पूर्व मेदिनीपुर के दीघा से पकड़ा गया। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट वारंट पर बेंगलुरु लाए जाने के बाद ताहा और शाजिब को मेडिकल टेस्ट के बाद विशेष आतंकवाद अदालत के न्यायाधीश के समक्ष उनके आवास पर पेश किया गया। जहां अदालत ने एनआईए को आगे की जांच के लिए आरोपियों की 10 दिनों की हिरासत पर भेज दिया गया।
कोलकाता में छिपे थे Bengaluru cafe Blast के आरोपी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग तीन सप्ताह तक, ज्यादातर कम बजट वाले , अंडर-द-रडार होटलों में, और बार-बार उपनाम बदलते हुए दोनों आरोपी पश्चिम बंगाल में रह रहे थे । दोनों व्यक्तियों से पूछताछ के आधार पर, जांचकर्ताओं का कहना है कि दीघा के अलावा, जहां वे अंततः पकड़े गए थे, माना जाता है कि वे लोग कोलकाता, पुरुलिया और दार्जिलिंग में रुके थे। आरोपी इन होटलों में क्रमशः झारखंड और त्रिपुरा के निवासी संजय अग्रवाल और उदय दास के नाम से चेक इन किया।
Bengaluru cafe Blast के लिए 35 नकली सिम का उपयोग
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों अक्सर होटलों के बीच आते-जाते थे और डिजिटल फुट प्रिन्ट छोड़ने से बचने के लिए केवल नकद भुगतान का इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा पुलिस से बचने के लिए, ताहा ने ऑपरेशन को वित्तपोषित करने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया था। एक अधिकारी ने कहा, उसने विस्फोट के लिए रसद की व्यवस्था करने के लिए शरीफ को क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर करने के लिए भारत के विभिन्न हिस्सों में आईएसआईएस के लिए भर्ती किए गए लोगों की चुराई गई पहचान और आईडी सहित विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल किया। इसके अलावा आरोपी ने सिम कार्ड बदले, और भागने के दौरान उन्होंने कम से कम 35 सिम कार्ड बदले।
Bengaluru cafe Blast जुड़े अन्य विषयों को लेकर जांच जारी
पुलिस ने दोनों के कोलकाता के होटलों में चेकिंग के सीसीटीवी फुटेज भी बरामद किए हैं। पश्चिम बंगाल की राजधानी में दोनों ने एस्प्लेनेड, खिदिरपुर और एकबालपुर जैसे क्षेत्रों में समय बिताया था। पुलिस ने यह भी कहा कि वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या उनके पश्चिम बंगाल में सहयोगी थे और उन्होंने इस राज्य को क्यों चुना?

