Kalki Dham: उत्तर प्रदेश के संभल में कल्कि धाम मंदिर के शिलान्यास समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज प्रधानमंत्री का संभल में आगमन हुआ है. ये नया भारत है. नए भारत में युवाओं की आजीविका की भी व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में जो पहले असंभव था वह अब संभव हो गया है। अबू धाबी में एक हिंदू मंदिर बनकर तैयार हो गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सीमाएं सुरक्षित होती हैं तो हर कोई सुरक्षित महसूस करता है। संभल में कृषि एवं हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया गया है। आज मुरादाबाद के पीतल उत्पाद, और अमरोहा के ढोल उन्नति कर रहे हैं।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘विकास और विरासत’ के मंत्र के साथ आज का भारत विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है. उत्तर प्रदेश के संभल में श्री कल्किधाम मंदिर के स्थापना कार्यक्रम का हिस्सा बनना सौभाग्य की बात है।
आज कुम्भ के आयोजन को यूनेस्को द्वारा मान्यता मिल रही है- मुख्यमंत्री योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज कुम्भ के आयोजन को यूनेस्को द्वारा मान्यता मिल रही है। क्या अबू धाबी में पहले कोई मंदिर संभव था? जो पहले असंभव था वह आज हो रहा है क्योंकि भारत मजबूत नेतृत्व के हाथों में है, जिसे वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है। आज 140 करोड़ का भारत सुरक्षित महसूस करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे मुरादाबाद का पीतल हो या फिर अमरोहा का ढोल, आज इन्हें पहचान मिल रही है। संभल जिले से गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे आने वाले समय 2025 में गंगा एक्सप्रेस-वे से प्रयागराज कुंभ की दूरी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि ये सभी कार्य प्रधानमंत्री के सफल नेतृत्व में नए भारत की कहानी बया कर रहा हैं।
पीएम मोदी ने रखी श्री कल्किधाम मंदिर की आधारशिला
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार को संभल में श्री कल्किधाम मंदिर की आधारशिला रखी और इसके मॉडल का अनावरण किया. श्री कल्किधाम का निर्माण श्री कल्किधाम कंस्ट्रक्शन फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है, जिसके अध्यक्ष आचार्य प्रमोद कृष्णम हैं।
कार्यक्रम में संतों ने प्रधानमंत्री मोदी को अंगवस्त्रम पहनाकर उनका स्वागत किया. इस मौके पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री मोदी को स्मृति चिन्ह भेंट किया और यहां आए सभी अतिथियों का स्वागत किया. इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई संत, धर्मगुरु और अन्य लोग मौजूद थे.

