गाजियाबाद। बादलपुर के एक गांव में मार्च 2022 में की गई एक महिला की हत्या का राज तीन साल बाद खुला। दरअसल महिला के परिवार वाले द्वारा पुलिम से किए गए शिकायत की जांच के दौरान पता चला कि महिला की हत्या 2020 में ही हो चुकी है।
चाचा के शक पर जांच
पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर डीसीपी धनंजय सिंह ने बताया कि रविकांत ने अपने भाई और बहनोई के साथ अपनी पत्नी की हत्या कर शव को रजाई के खोल में लपेटकर रेलवे लाइन के पास फेंक दिया था। मामले को छिपाने के लिए रवि ने तरह तरह के उपाय भी किए। इस दौरान उसने पुजारी का काम छोड़ दिया। अपने कई ठिकाने बदले ताकि उसके रिश्तेदार और अंजू के मायके पक्ष के लोग उससे संपर्क न कर सकें। लेकिन उसके मायके वाले बार बार उससे बात करने की कोशिस कर रहे थे। जब वो नहीं मना तो अंजू के चाचा ने पुलिस से इसकी शिकायत की, कि उसका दामाद तीन साल से तरह-तरह के बहाने बनाकर बेटी से नहीं मिलने दे रहा है। पुलिस ने जब गांव के शिव मंदिर में पुजारी रहे उनके दामाद रविकांत शर्मा (35) को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पता चला कि उसने अपनी पत्नी अंजू की मार्च 2020 में ही हत्या कर चुका है। जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ।
पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
पुलिस ने बताया की हिरासत में लिए जाने के बाद उसने पुलिस को भी गुमराह करने का प्रयास किया। उसने पुलिस को बताया कि वह अंजू को ऋषिकेश ले गया था। जहां डूबने से उसकी मौत हो गई। लेकिन जब ऋषिकेश पुलिस से संपर्क किया गया तो पता चला कि गाजियाबाद निवासी किसी अंजू की इस तरह से मौत नहीं हुई है। इसके बाद इसके बाद सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने जुर्म कुबूल करते हुए पूरा घटनाक्रम बताया।
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दीवार पर सिर मारकर की थी हत्या
डीसीपी ने बताया कि रविकांत मार्च 2020 में बड़े भाई विक्रांत के पास अच्छेजा गया था। विक्रांत भी उस समय पास के मंदिर में पुजारी था। वे दोनों और बहनोई महेंद्र शराब पी रहे थे। अंजू ने रविकांत से शराब पीने से मना किया और घर चलने के लिए कहा। इस बात पर उसने उसने अंजू का सिर दीवार में दे मारा। जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद तीनों शव को रजाई के खोल में डालकर रेलवे लाइन के पास फेंक आए। बादलपुर थाना पुलिस को दो अप्रैल को एक अज्ञात शव मिला था।

