मासिक धर्म यानि पीरियड्स महिलाएं हर महीने मेंसुरेशन से गुजरती हैं। महिलाओं के लिए यह प्रक्रिया बेहद ही जरूरी मानी जाती है। एक महिला को पीरियड्स आने इसलिए जरूरी होते हैं क्योंकि मेंसुरेशन साइकिल प्रेग्नेंसी के लिए बेहद जरूरी माना जाती है लेकिन महिलाओं को मासिक धर्म में पेट दर्द, क्रैंप्स, शरीर दर्द, बुखार की तकलीफों को झेलना पड़ता है।
स्मृति ईरानी ने कहा मासिक धर्म नहीं कोई बाधा पेड लीव से महिलाएं समान अवसर से रह जाएंगी वंचित
रोजमर्रा काम करने वाली महिलाओं के लिए और भी परेशानी हो जाती है कई देशों में तो महिलाओं को मासिक धर्म यानि पीरियड्स में पेड लीव दी जाती है लेकिन भारत में अभी मासिक धर्म यानि पीरियड्स में पेड लीव का कोई कानून नहीं है और बुधवार को राज्यसभा में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बड़ी बात कही कि उनसे सवाल पूछा गया कि क्या सरकार महिलाओं को पीरियड्स में पेड लीव के ऊपर कोई कानून बनाने पर विचार कर रही है (Mensuration Paid Leave) तो इस पर स्मृति ईरानी ने कहा पीरियड्स कोई बाधा नहीं है तो पेड लीव नीति की कोई आवश्कता नहीं है। आज महिलाएं अधिक से अधिक आर्थिक अवसरों के विकल्प चुन रहीं हैं मैं अपने व्यक्तिगत विचार रखते ये कहना चाहूंगी कि हमें ऐसे मुद्दों पर प्रस्ताव नहीं रखना चाहिए जहां महिलाओं को किसी भी तरह से समान अवसर से वंचित रखा जाए।
स्मृति ईरानी के इस बयान पर सोशल मीडिया पर लोग दे रहे कई तरह की प्रतिक्रियाएं
इसके बाद राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने सवाल पूछा कि क्या सरकार सैनेटरी नैपकिन में हानिकारक केमिकल रोकने के लिए कोई कदम उठाने पर विचार कर रही है इस पर ईरानी ने जवाब देते हुए कहा यह सवाल मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ा है इस सवाल का महिला एवं बाल विकास से कोई लेना देना नहीं है। (Mensuration Paid Leave) केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनसे सवाल पूछे जाने लगे हैं कि खुद महिला होकर वो इस तरह का बयान कैसे दे सकती हैं कि महिलाओं को पीरियड्स के लिए पेड लीव नीति की आवश्कता नहीं है। महिला होकर वो महिलाओं के दर्द को समझ नहीं पा रही हैं। कह तो आसानी से दिया लेकिन असहनीय दर्द,अन्कम्फर्ट, इरिटेशन,वीकनेस.. ये सब बाधायें ही तो हैं।

