राज्यसभा में भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Women Reservation Bill) पास हो जाने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस बिल का स्वागत किया देश और भरपूर वे जोरदार तरीके से इस अधिनियम का स्वागत करता अगर इसे तुरंत लागू कर दिया जाता। 27 साल के लंबे इंतजार के बाद महिलाओं को उनका हक मिला है और अब इसे लागू करने के लिए आगे और लंबा इंतजार करना कितना न्यायसंगत?
बसपा चीफ मायावती ने राज्यसभा से भी महिला अधिनियम पास पर दी प्रतिक्रिया
बसपा चीफ मायावती ने कहा नए संसद में महिलाओं के लिए ये अधिनियम (Women Reservation Bill) पास होना एक ऐतिहासिक पल है देश के लिए लेकिन बिल में सरकार को ओबीसी समाज की महिलाओं को भी शामिल करना चाहिए साथ ही एससी व एसटी वर्ग की महिलाओं को अलग से आरक्षण देना चाहिए और इस विधेयक को तत्काल प्रभाव से लागू करने के सभी जरूरी उपाय सरकार को करने चाहिए।

लोकसभा से भी बिल पारित होने पर मायावती ने दी थी ये प्रतिक्रिया
बता दें लोकसभा से जब महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) पास हुआ था तब भी बसपा प्रमुख मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वह महिला आरक्षण बिल के साथ हैं। आबादी के हिसाब से 50 फीसदी आरक्षण रहे तो अच्छा रहेगा। आरक्षण में एससी-एसटी और ओबीसी का कोटा सुनिश्चित किया जाना चाहिए। बसपा प्रमुख ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता करते हुए कहा था कि कि हम इसलिए समर्थन करेंगे क्योंकि यहां पर हर धर्म और जाति की महिलाओं को हर मामले में पुरुषों की तुलना में अभी तक पिछड़ा बनाकर रखा है। देश में सर्वसमाज की महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और उनकी हालत में जरूरी सुधार लाने को लेकर बातें तो बहुत की जाती हैं लेकिन उन पर पूरी ईमानदारी और साफ नियत से अमल करने की बजाए उनकी घोर अनदेखी करना तथा आधे अधूरे मन से काम किया जाता है।
बसपा चीफ मायावती ने पीसी में कहा था कि संविधान के मानवीय और कल्याणकारी उद्देश्यों के साथ ही पहले एससी-एसटी और अब ओबीसी समाज के आरक्षण को निष्क्रिय और निष्प्रभावी बनाने का खिलवाड़ लगातार किया जा रहा है। इन मामलों में कोई भी पार्टी किसी से कम नही हैं। बल्कि कोई पार्टी थोड़ा कम और थोड़ा उससे ज्यादा है देश की महिलाओं को लोकसभा और राज्यसभा के विधानसभाओं में आरक्षण 33 प्रतिशत की बजाए उनकी आबादी को ध्यान में रखा जाए तो 50 फीसदी आरक्षण हो।
सरकार इसके बारे में भी जरूर सोच विचार करे। इसके साथ ही साथ यह भी कहा था कि महिलाओं को जो भी आरक्षण दिया जाता है, उसमें एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं का कोटा अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

