Lakhimpur Violence News : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लखीमपुर हिंसा की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को यह कहते हुए भंग कर दिया कि जांच पूरी हो गई है। उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन, जिन्हें मामले की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी, को शीर्ष अदालत ने राहत दे दी। गौरतलब है कि, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में तिकुनिया के पास बनबीरपुर गांव में चार किसानों और एक पत्रकार को एक वाहन द्वारा रौंद दिए जाने के बाद हिंसा भड़क गई थी। किसानों को कुचलने वाली कार गृह राज्य मंत्री (एमओएस) अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की थी। परिणामस्वरूप, प्रतिशोध में प्रदर्शनकारियों द्वारा दो भाजपा सदस्यों और एक ड्राइवर की कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी।
किसान बिल को लेकर हुए थे प्रदर्शन
यह घटना अक्टूबर 2021 में केंद्र द्वारा बनाए गए तीन विवादास्पद कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध की पृष्ठभूमि में हुई थी। प्रदर्शनकारी एक रैली के लिए यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की यात्रा को रोकने की कोशिश कर रहे थे। सड़क पर चल रहे किसानों को तेज रफ्तार थार ने टक्कर मार दी थी। थार के पीछे चल रही दो अन्य कारों ने घायल किसानों को कुचल दिया था। उग्र प्रदर्शनकारियों ने थार और फॉर्च्यूनर कार में आग लगा दी थी। कार सवार तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक कार का चालक घटना स्थल से भागने में सफल हुआ था। इस घटना में कुल मिलाकर आठ लोग मारे गए थे।
किसानोें को मिला था मुआवजा
इस घटना ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ के इस्तीफे और उसके बाद उनके बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी की मांग करते हुए भाजपा पर विपक्ष का हमला तेज हो गया था। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। हालांकि, केंद्रीय मंत्री मिश्रा ने दावा किया कि इस घटना में किसानों के भेष में कुछ असामाजिक तत्व शामिल थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाए थे कि उनके बेटे के काफिले पर हमला किया गया था। यूपी सरकार ने किसान समूहों के साथ विचार-विमर्श के बाद मृत किसानों के परिवारों के लिए 45-45 लाख रुपये और घायलों के लिए 10-10 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की थी। सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर जज की अध्यक्षता में जांच की घोषणा की थी।
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सर्वोच्च न्यायलय से मिली थी राहत
एएनआई ने डीआईजी उपेन्द्र अग्रवाल के हवाले से बताया कि कड़ी पूछताछ के बाद आशीष मिश्रा ‘टेनी’ को जांच में ‘सहयोग नहीं करने’ के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने टेनी को जमानत दे दी। हालाँकि, HC के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसने टेनी की जमानत के फैसले को रद्द कर दिया। टेनी को बाद में शीर्ष अदालत ने अंतरिम राहत दी थी। मामले में फिलहाल शीर्ष अदालत ने आशीष मिश्रा टेनी की अंतरिम जमानत 26 सितंबर तक बढ़ा दी है।

