नोएडा सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल में प्रभारी मंत्री बृजेश सिंह स्वास्थ्य सेवाओं का निरीक्षण किया। वे अस्पताल में भर्ती मरीजों से मिले। उनसे बातचीत की और मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। इसके बाद फार्मेसी काउंटर पर गए। वहां लाइन में खड़े मरीजों से पूछा की दवा बाहर की मिल रही है या अस्पताल में। जवाब से संतुष्ट होने के बाद उन्होंने पैथोलॉजी लैब , आईसीयू और सामान्य वार्ड का निरीक्षण किया। इस मौके पर उन्होंने सीएमएस से कहा कि आपका अस्पताल अन्य अस्पतालों की तुलना में बेहतर है।
बता दें अस्पताल में 20 बेड का आईसीयू हाल ही में खोला गया है। प्रभारी मंत्री ने सीएमएस और सीएमओ को निर्देशित किया कि समय से डॉक्टर अस्पताल आए। अस्पताल स्टॉफ का मरीजों के प्रति व्यवहार बेहतर होना चाहिए। अस्पताल में साफ-सफाई का विशेष ध्यान दिया जाए। दवाएं अस्पताल से ही मिले जो भी डॉक्टर बाहर की दवा लिखे उनके खिलाफ एक्शन लिया जाए। इस दौरान उन्होंने आश्वस्त किnoidaया जो भी कमी है उसे दुरस्त किया जाएगा।
इसके बाद मरीजों से बातचीत की। उन्होंने मरीज से पूछा की कही ऐसा तो नहीं हमारे आने की जानकारी मिलते ही चादर बदली गई हो। दवाएं टाइम से मिल रही है रोजाना साफ-सफाई होती है कि नहीं। मरीजों के जवाब से वो संतुष्ट दिखे। उन्होंने मरीजों की बीमारी के बारे में पूछा। अधिकांश को प्लेटलेट्स डाउन होने और बुखार की समस्या बताई गई।
हार्ट फिटनेस जांच टीएमटी मशीन का शुभारंभ
हार्ट फिटनेस जानने के लिए ईसीजी और ईको टेस्ट भी होता है। टीएमटी यानी ट्रेडमिल टेस्ट के जरिए मशीन पर मरीज को दौड़ाकर उसके हार्ट पर दबाव दिया जाता है। इससे उसका स्टेमिना भी पता चलता है और हार्ट पंप कितनी तेजी से काम कर रहे हैं या धड़कन का पता चलता है। इसके अलावा इको जांच भी अस्पताल में होगी। इनका शुभारंभ प्रभारी मंत्री बृजेश सिंह ने किया। दरअसल ये जांच निजी अस्पताल में काफी महंगी होती है। जिसको करा पाना लोगों के लिए मुश्किल है। सरकारी अस्पताल में सुविधा होने से मरीजों को काफी सहुलियत होगी।
अस्पताल गेट पर टूटी टाइल्स
प्रभारी मंत्री आने से ठीक पहले ही अस्पताल गेट की दीवार पर लगी टाइल्स टूट कर गिर गई। आलम ये है गेट की दीवार पर लगा सीमेंट तक बाहर गया। ये घटिया निर्माण की पोल खोलने के लिए काफी है। सीएमएस की ओर से शासन को अस्पताल की मरम्म्त कराने के लिए लिखा है। बावजूद इसके अब तक यहां मरम्मत का काम नहीं किया जा सका है। इससे पहले भी अस्पताल में सील फालिंग , टाइल्स गिरने की घटना हो चुकी है।

