फर्जी तरीके से 2660 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कराकर करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान पहुंचाने वाले तीन वांछित आरोपियो के खिलाफ आज मुनादी कराई गई। दिल्ली स्थित तीनों आवास पर धारा-82 सीआरपीसी का नोटिस चस्पा किया गया। मुनादी में बताया गया कि ये तीनो ही नोएडा के थाना सेक्टर-20 के वांछित है। इनकी जानकारी मिलते ही पुलिस को सूचना दी जाए। इन तीनों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम रखा गया है।
दरअसल इस पूरे गैंग ने मिलकर करीब 15 हजार करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा फर्जी जीएसटी कंपनियां बनाकर किया था। पुलिस ने इस मामले की शुरुआत में 8 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद गिरफ्तारी का सिलसिला बढ़ता चला गया। अब तक करीब 20 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस गैंग में शामिल अंचित गोयल पुत्र प्रदीप गोयल पता सी-7 तृतीय तल कोटेज रोड आदर्श नगर दिल्ली , प्रदीप गोयल पुत्र मिश्री लाल पता सी-7 तृतीय तल कोटेज रोड आदर्श नगर दिल्ली , अर्जित गोयल पुत्र पवन गोयल पता मकान न-150 तृतीय तल ब्लॉक ए पॉकेट 3 सेक्टर 16 रोहिणी दिल्ली से फरार है। इनकी गिरफ्तारी को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे है। ऐसे में न्यायालय द्वारा जारी नोटिस अंतर्गत धारा 82 सीआरपीसी चस्पा कर नोटिस चस्पा कर व लाउड हेलर द्वारा मुनादी कराई गई।
ये है मामला
नोएडा कमिश्नरेट पुलिस ने 1 जून को 2660 फर्जी कंपनी बना जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराकर 15 हजार करोड़ से अधिक का फ्रॉड करने वाले एक अंतरराज्यीय रैकेट का खुलासा किया था। इन जालसाजों ने पिछले पांच साल से फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी रिफंड आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) प्राप्त कर सरकार को हजारों करोड़ का चूना लगाया था। मामले में नोएडा पुलिस के साथ राज्य व केंद्र की जीएसटी टीम भी जांच कर रही है।
ऐसे किया फर्जीवाड़ा
जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में ऐसी व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें पहले भुगतान किए गए जीएसटी के बदले में आपको क्रेडिट मिल जाते हैं। ये क्रेडिट आपके जीएसटी अकाउंट में दर्ज हो जाते हैं। फर्जी कंपनियों के द्वारा वास्तविक माल का आदान प्रदान नहीं किया जाता है। बल्कि जाली बिल पर करोड़ों रुपये का लेनदेन दिखाया जाता है। सभी बिल फर्जी होते हैं। कंपनियां एक दूसरे से फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का आदान प्रदान करती हैं। व्यापार दिखाने वाली अंतिम फर्म सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड का दावा कर देती है। रिफंड के तौर पर कंपनी के खाते में सरकार रुपया जमा कर देती है। इसमें कोई व्यापार नहीं हुआ जबकि सरकार से करोड़ों रुपये इनपुट टैक्स क्रेडिट के बदले लेकर कंपनी चूना लगाती है।

