नोएडा होम बासर्य को सहुलियत देने के लिए नोएडा और ग्रेटरनोएडा प्राधिकरण छ सूत्रीय कार्ययोजना पर काम करने जा रहा है। इसमें उन बिल्डर योजनाओं के आवंटन रद्य किया जाएगा जिनका निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो सका है। को-डेवलर्स के जरिए आंशिक परियोजना को पूरा करने की अनुमति देना। आंशिक परियोजनाओं को सरेंडर करने के विकल्प देना, गैर-अनुपालन वाली परियोजनाओं को रद्द करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, योजना में ज्यादा बकाया होने पर उसको पुनर्निर्धारित करना शामिल है। इसके बाद भी बिल्डर नहीं मानते तो रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।
रिपोर्ट का भी किया जा रहा अध्ययन
इसके अलावा अमिताभ कांत की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ प्रभाष कुमार ने बताया कि अमिताभ कांत की रिपोर्ट का विस्तृत अध्यन किया जा रहा है। आगामी बोर्ड बैठक में बिल्डर और बायर्स दोनों की सहुलियत के लिए कोई स्कीम लाई जाएगी। इसके बाद भी नोएडा और ग्रेटरनोएडा में करीब दो लाख यूनिट ऐसी है जिनको अब तक आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी ) नहीं मिला है। ये प्राधिकरण को भी नहीं पता कि इनका निर्माण हुआ है या नहीं। बड़ी बात ये है दोनों ही प्राधिकरण में ये यूनिट सेंक्शन है। जिन पर अब पजेशन मिल जाना चाहिए था। यानी इन यूनिट के लिए भी बायर्स ने बुकिंग एमाउंट या इससे कही ज्यादा पैसा बिल्डर को दे दिया है।
बिल्डरों को दोनों प्राधिकरण का बकाया पैसा
बिल्डरों पर दोनों प्राधिकरण का कुल मिलाकर 40657.7 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है। इसमें से 26579 करोड़ रुपये नोएडा प्राधिकरण और 14309 करोड़ रुपये ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर बकाया है। अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि अगर कोई प्रोजेक्ट अभी तक शुरू नहीं हुआ है तो उसका आवंटन रद्द कर देना चाहिए। लीज डीड के अनुसार जमा राशि में कटौती करने के बाद, शेष धनराशि को एस्क्रो खाते में रखा जाना चाहिए, और आनुपातिक राशि प्रभावित घर खरीदारों को लौटा दी जानी चाहिए।
अब तक 2 लाख यूनिट को नहीं मिला ओसी
नोएडा ग्रेटरनोएडा प्राधिकरण ने बिल्डर परियोजनाओं के अनुसार कुल 43,1064 यूनिट सेंक्शन है। इसमें 212752 यूनिट के लिए प्राधिकरण ने ओसी जारी की। यानी अब तक 218312 यूनिट को ओसी ही जारी नहीं की गई। जिनका निर्माण कब तक होगा इसकी जानकारी प्राधिकरण के पास नहीं है। मसलन ये सभी परियोजनाएं काफी लेट है।

