दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के निलंबित डिप्टी डायरेक्टर प्रेमोदय खाखा द्वारा नाबालिग से बलात्कार के मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। प्रेमोदय खाखा और उसकी पत्नी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। आज दोनों की हिरासत खत्म हो रही थी, जिसके बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया था।
पीड़ित बच्ची की पहचान उजागर न हो
चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली बेंच ने संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पीड़ित बच्ची की पहचान उजागर न हो। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि आपने बच्ची की पहचान छुपाने के लिए क्या कदम उठाए हैं। कोर्ट को जानकारी दी गई कि रेप पीड़िता की हालत नाजुक है। कल ही उसे दौरे भी पड़े हैं। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने बताया कि इस मामले में कई लापरवाही हुई हैं, जिसको देखते हुए हम अपना जवाब दाखिल करेंगे।
पीड़िता आरोपी खाखा को मामा कहकर बुलाती थी
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने खाखा को 21 अगस्त को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। खाखा की पत्नी सीमा रानी को कोर्ट ने पहले ही हिरासत में भेजा था। खाखा पर आरोप है कि उसने अपनी दोस्त की नाबालिग बेटी के साथ नवंबर, 2020 और जनवरी, 2021 के बीच कई बार रेप किया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक पीड़िता के पिता की 1 अक्टूबर, 2020 को मौत हो गई थी, जिसके बाद खाखा ने उसे अपने घर उसकी देखभाल के लिए बुला लिया था। पीड़िता आरोपी खाखा को मामा कहकर बुलाती थी। खाखा की पत्नी ने पीड़िता को गर्भ हटाने वाली गोली खिलाई थी।
पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज
दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ पॉक्सो की विभिन्न प्रावधानों के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) , 509, 506, 323, 313, और 120बी के तहत एफआईआर दर्ज की है। खाखा दिल्ली सरकार के महिला और बाल विकास विभाग में डिप्टी डायरेक्टर था। मामला सामने आने के बाद उसे निलंबित कर दिया गया है।

